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विशेष बातचीत: राज्यपाल शुक्ल बोले- विधायकों का उपयोग कर्मचारियों के स्थानांतरण के लिए हो रहा, जो अच्छा नहीं

Wed, 14 Jun 2023 11:41 AM IST
अरविन्द ठाकुर अमर उजाला ब्यूरो, शिमला

सार

राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल ने कहा कि व्यवस्था नशे के फैलते कारोबार को रोकना चाहती है, पर जागरूकता पैदा करने के तरीके ढूंढने होंगे। शराब से एक्साइज आता है तो इस पर कोई रोक नहीं है। चिट्टा या हशीश नई पीढ़ी को बर्बाद करने आएगा तो इसे रोकने के नए प्रयोग करने होंगे।
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राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल को हिमाचल प्रदेश में नियुक्त हुए करीब चार महीने हो गए हैं। राज्य के सांविधानिक प्रमुख होने के नाते वह देवभूमि की कई समस्याओं की चिंता लिए हैं तो जिलों में खुद जाकर सरकारी योजनाओं की समीक्षा भी कर रहे हैं। हालांकि उनका कहना है कि राज्यपाल हैं तो लोगों की चुनी हुई किसी भी लोकप्रिय सरकार को किसी तरह से डिस्टर्ब करने के पक्ष में नहीं हैं। वह नशाखोरी के विरुद्ध मोर्चेबंदी, टीबी मुक्त भारत और मिलेट्स जैसे अभियानों को आगे बढ़ाने के पक्षधर हैं। अमर उजाला के राज्य ब्यूरो प्रमुख सुरेश शांडिल्य ने मंगलवार को उनसे राजभवन में विशेष बातचीत की, प्रस्तुत हैं इसके अंश :

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हिमाचल प्रदेश का राजनीतिक माहौल कैसा है?
यहां मुझे एक चीज कतई अच्छी नहीं लगी। यहां पर विधायकों का इस्तेमाल केवल कर्मचारियों के स्थानांतरण के लिए किया जाता है। विधायक जनप्रतिनिधि होते हैं तो वे लोगों की बातों को सुनने के लिए मजबूर होते हैं। इसमें विधायकों की भी गलती नहीं है। आवश्यकता हो तो जरूर उपयोग किया जाए, मगर हर समय ऐसा करना उचित नहीं है। यहां की विधानसभा बिलकुल अच्छे ढंग से चलती है। विधानसभा में सार्थक बहस होती है। आम लोगों को इस बारे में सोचने की जरूरत है कि वे इस पर विचार करें। 

देवभूमि के सांस्कृतिक वातावरण पर क्या कहते हैं?
देवभूमि हिमाचल प्रदेश का सांस्कृतिक माहौल अच्छा है। सबसे अच्छी बात यह लगी कि इस छोटे से राज्य में भी इतनी ऊर्जा रही है कि कलाकारों का एक वंश शिमला से निकला है। बलराज साहनी, प्रेम चोपड़ा, गोपी कृष्ण जैसे लोग यहां से निकले हैं। हिमाचल प्रदेश देवभूमि है तो इसकी पवित्रता भी रहनी चाहिए। हिमाचल के घरों में नशा प्रवेश कर चुका है। अगर घरों में पवित्रता नहीं रही तो देवभूमि की सांस्कृतिक पवित्रता भी किसी रूप में नहीं रह सकती। 
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क्या राजभवन को भी रिट्रीट की तरह आम लोगों के लिए खोल रहे हैं? 
इस बारे में मेरी सचिव राजेश शर्मा से बातचीत हुई है। शनिवार और रविवार का दिन ऐसा रखने को कहा है, जिसमें बच्चे राजभवन आकर इस ऐतिहासिक भवन को देख सकें और इसके महत्व को जान सकें।

हिमाचल प्रदेश विद्वविद्यालय में कुलपति की नियुक्ति क्यों अटकी पड़ी है?
यह नियुक्ति कर दी जाएगी। इसकी एक प्रक्रिया है। 

युवा पीढ़ी को नशे से मुक्त करने की मुहिम में व्यवस्था के रुख से कितने संतुष्ट हैं? 
व्यवस्था नशे के फैलते कारोबार को रोकना चाहती है, पर जागरूकता पैदा करने के तरीके ढूंढने होंगे। शराब से एक्साइज आता है तो इस पर कोई रोक नहीं है। चिट्टा या हशीश नई पीढ़ी को बर्बाद करने आएगा तो इसे रोकने के नए प्रयोग करने होंगे। मुख्यमंत्री इससे सहमत हैं। सीएम की पिछले कल कही यह बात अच्छी लगी कि स्कूलों में हर प्रार्थना सभा के समय दस मिनट योगाभ्यास के लिए भी हों। तभी तो नई पीढ़ी में नशाखोरी रुकेगी। यही पंचायतों को भी करना चाहिए। पंचायत स्तर पर पेनल्टी की व्यवस्था होनी चाहिए। 

आपने जिलों के भी बहुत दौरे किए हैं, प्रदेश को मुख्यधारा में लाने के लिए क्या करने की जरूरत है? 
जिलों में जब जाता हूं तो केंद्र सरकार और हिमाचल सरकार की योजनाओं की कार्य प्रगति की समीक्षा करता हूं। कई जगह देखने को मिला कि लाभार्थियों में कुछ गलत नाम भी चढे़ हैं। वे पात्र नहीं हैं। ऐसे कई मामलों में रिकवरी भी हुई है। योजनाओं का लाभ असल लाभार्थियों तक पहुंचना चाहिए। आयुष्मान और हिमकेयर जैसी योजनाएं केंद्र और राज्य सरकार दोनों के प्रयास से चल रही है। यह अच्छा भी है।  

क्या सरकार की जवाबदेही तय करने के लिए भी कुछ कदम उठाए हैं? 
जवाबदेही की जहां तक बात है तो लोकप्रिय सरकार को प्राथमिकता देने की जरूरत है। राजभवन में राज्यपाल हैं तो इसका मतलब यह नहीं है कि लोगों की चुनी हुई लोकप्रिय सरकार को डिस्टर्ब किया जाए।  

हिमाचल में आप किन-किन विषयों पर विशेष कार्य करना चाहते हैं?
ड्रग्स पर काम करने की जरूरत है। टीबी मुक्त भारत बनाने की दिशा में काम करना जरूरी है। अधिकारियों को निक्षय मित्र बनना चाहिए। यानी टीबी मरीजों के इलाज की जिम्मेवारी लेनी चाहिए। इसमें ज्यादा खर्च नहीं आएगा। छह महीने के लिए एक माह में हजार-हजार रुपये ही खर्च होंगे। मोटे अनाज यानी मिलेट्स पर भी हिमाचल में काम हो रहा है। 

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