सरकारी कर्मचारियों और पेंशनरों के लिए तय इलाज नहीं करने वाले सूचीबद्ध अस्पतालों पर कार्रवाई की तैयारी कर ली गई है। इन अस्पतालों को एंपैनल करने के मानकों पर हिमाचल सरकार संशोधन पर विचार करेगी। स्वास्थ्य मंत्री विपिन परमार ने इसकी पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि हिमाचल के कर्मचारियों और पेंशनरों के लिए सैकड़ों अस्पताल अधिकृत हैं। ये हिमाचल ही नहीं, राज्य से बाहर भी हैं। इनमें कर्मचारियों और पेंशनरों के इलाज में किसी भी तरह की कोताही सहन नहीं की जाएगी।
वर्तमान में हिमाचल और राज्य से बाहर के सैकड़ों अस्पतालों में कर्मचारियों और पेंशनरों के इलाज करने पर मेडिकल रिइंबर्समेंट का लाभ मिल रहा है। कुछ अस्पतालों के बारे में शिकायत मिल रही है कि इनमें से कई ऐसे हैं, जिन्होंने कागजों में तो कई तरह की सुविधाओं का उल्लेख किया है, मगर हकीकत में ऐसा नहीं है। पिछले करीब एक दशक से इन अस्पतालों की एंपैनलमेंट को बार-बार रिन्यू करने का चलन भी चला हुआ है।
ऐसे में हिमाचल सरकार चाह रही है कि ऐसे अस्पतालों को सूचीबद्ध करने की प्रक्रिया को और अधिक जटिल किया जाए। आम तौर पर ऐसे सूचीबद्ध अस्पताल कर्मचारियों और पेंशनरों को आकर्षित करने के लिए तमाम तरह के प्रयास तो कर रहे हैं, मगर वे मानकों के अनुरूप या आज की जरूरत के अनुसार सुविधाएं नहीं बढ़ा रहे हैं। कई अस्पतालों में न तो मानकों के अनुरूप स्टाफ है और न ही मशीनरी लगाई गई है।