अब एक इंजेक्शन से शरीर के अंदरूनी हिस्से में छुपे क्षय रोग (टीबी) के संक्रमण का पता चल सकेगा। इसमें इंजेक्शन से शरीर में एंटीजन का घोल इंजेक्ट किया जाएगा। हालांकि, टेस्ट का सकारात्मक परिणाम आने का मतलब कतई नहीं है कि व्यक्ति को सक्रिय टीबी रोग निश्चित रूप से है। सक्रिय क्षय रोग का पता लगाने के लिए चिकित्सक लक्षणों के अनुसार बलगम की जांच, एक्सरे या अन्य परीक्षण करवाते हैं। दूसरी ओर सीवाई-टीबी टेस्ट का सबसे अधिक फायदा उच्च जोखिम श्रेणी में आने वाले लोगों को मिलेगा। साथ ही क्षय रोग होने से पहले ही लोगों को दवा से उपचार भी दिया जा सकेगा। इस टेस्ट में इंजेक्शन का इस्तेमाल किया जाता है।
इंजेक्शन को बाजू पर इंजेक्ट करने के बाद आने वाले लक्षणों से टीबी का पता लग रहा है। जिला शिमला क्षय रोग अधिकारी डॉ. विनीत लखनपाल ने बताया कि टीबी मुक्त करने के प्रयास में कार्य किया जा रहा है। सीवाई-टेस्ट के माध्यम से भविष्य में होने वाले टीबी का पता लगाकर दवाएं दी जा रही हैं।
क्यों है जरूरी
उच्च जोखिम श्रेणी यानी उच्च रक्तचाप, शुगर, अस्थमा, कैंसर, किडनी, हार्ट की बीमारी के मरीजों के साथ धूम्रपान करने वालों में टीबी का खतरा रहता है। अगर टीबी और उच्च जोखिम बीमारी में से कोई एक भी व्यक्ति को हो जाए तो परेशानी बढ़ जाती है। ऐसे में विभाग ने टीबी से बचाने के लिए पहले ही पता लगाने के तरीके को अपनाया है।