एक वार्डन की ओर से सरकारी कमरों को गैर कानूनी तरीके से अपने पास रखने पर राज्य सूचना आयोग ने कड़ा संज्ञान लिया है। आयोग ने कहा कि कमरों का किराया और बिजली बिल वगैरह भी अभी तक चुकता नहीं किए गए हैं। ऐसे में इस मामले को अथॉरिटी की ओर से प्रशासनिक रूप से देखे जाने की जरूरत है। इन निर्देशों के साथ इस अपील का निपटारा किया जाता है। समग्र शिक्षा अभियान के राज्य परियोजना निदेशक का इस संबंध में ध्यान लाया जाता है, वह इसे देखें।
राज्य मुख्य सूचना आयुक्त नरेंद्र चौहान की आरटीआई अदालत में इस अपील का निपटारा किया गया। अल्पना अग्रवाल बनाम प्रधानाचार्य डाइट की इस अपील पर सुनवाई के दौरान आयोग ने कहा कि यह सूचना डाइट नाहन के छात्रावास के वार्डन से संबंधित मांगी गई है। इसमें पूछा कि वार्डन ने क्या हॉस्टल के कमरों को क्या खाली किया है। कितने कमरों को वार्डन ने अपने पास ले रखा है। संबंधित कमरों का किराया, बिजली शुल्क आदि चुकता किया है कि नहीं।
इससे संबंधित अन्य जानकारी भी मांगी गई। उप निदेशक प्रारंभिक शिक्षा नाहन ने डाइट के प्रधानाचार्य को निर्देश दिए कि संबंधित सूचना को प्रधानाचार्य आवेदक को पांच दिन में निशुल्क जारी करे। हालांकि, ऐसी कोई सूचना नहीं दी गई। अब आयोग के पास इस अपील को प्रथम अपीलीय अथॉरिटी के आदेश को लागू नहीं करने पर किया गया है।
अंतिम आदेश के तहत जनसूचना अधिकारी को एक कारण बताओ नोटिस भी जारी किया गया कि क्यों न आरटीआई एक्ट के तहत यह वांछित सूचना नहीं देने पर पेनल्टी लगाई जाए। आयोग ने यह भी कहा कि अगर जनहित का मामला है तो थर्ड पार्टी सूचना को दिया जा सकता है। प्रधानाचार्य ने कहा कि थर्ड पार्टी सूचना के इस तथ्य के बारे में उन्हें जानकारी नहीं थी। ऐसे उन्हें चेतावनी दी जाती है कि भविष्य में इस तरह की लापरवाही बरते जाने की सूरत में पेनल्टी लगाने की कार्रवाई की जाएगी।