हिमाचल के मुख्यमंत्री और वित्त मंत्री जयराम ठाकुर नौ मार्च को अपनी सरकार का पहला बजट पेश करेंगे। जयराम के इस पहले वार्षिक बजट में हाल ही में पेश केंद्रीय बजट की ‘मेरा गांव मेरा देश’ वाली छाप नजर आ सकती है।
वित्तीय वर्ष 2018-19 के इस बजट का कृषि, स्वास्थ्य और शिक्षा पर खास फोकस रह सकता है। विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा ने चुनाव घोषणापत्र के स्थान पर अपना स्वर्णिम दृष्टिपत्र -2017 में हिमाचल की जनता से कई वायदे किए थे। अपने पहले बजट अनुमानों में मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर इन वायदों को लेकर कई प्रावधान कर सकते हैं।
वर्तमान में हिमाचल प्रदेश करीब 45 हजार करोड़ रुपये के कर्जे में डूबा है। खुद मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर इससे चिंतित हैं। इस बार प्रदेश का बजट अनुमान भी लगभग 45 हजार करोड़ रुपये तक रखा जा सकता है, जो पिछले बजट में 40 हजार करोड़ रुपये के आसपास रहा है। इसमें राज्य को कर्जमुक्त करने के लिए संसाधनों को विकसित करने पर भी जोर दिया जा सकता है।
इस बार कृषि भूमि के विकास कार्यों में लगने पर मुआवजे को दोगुने से चौगुना करने के स्वर्णिम दृष्टिपत्र के वायदे को भी सरकार बजट में शामिल कर सकती है। सोलर पंपिंग से खेतों तक सिंचाई का पानी पहुंचाने के लिए एक व्यापक योजना की घोषणा हो सकती है।
सेब, आम और संतरे के समर्थन मूल्य में बढ़ोतरी, दूध खरीद की दर और फ सल बीमा योजना का दायरा बढ़ाने, मार्केटिंग कमेटियों की कार्यप्रणाली में सुधार लाने, कृषि उपकरणों के लिए सब्सिडी, ऋण देने, सोलर फेंसिंग योजना में अतिरिक्त बजट प्रावधान करने, प्रदेश में केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय खोलने, पॉली हाउस की फिल्म बदलने को भी 80 फीसदी सब्सिडी, सीए स्टोर खोलने, सेब बागवानी एवं चाय उद्योग को बढ़ावा देने को नई योजनाएं शुरू करने जैसे कई वायदों का बजट घोषणाओं में जिक्र हो सकता है।