शराब की दुकानों की नीलामी में हो रहे घाटे को पूरा करने के लिए प्रदेश बेवरेजेस लिमिटेड कॉरपोरेशन नीलाम न होने वाली दुकानों को खुद बेचेगा। इसके लिए आबकारी एवं कराधान विभाग को सरकार ने मंजूरी दे दी है। विभाग ने यह निर्णय चंबा और किन्नौर में शराब बिक्री का लाइसेंस लेने के लिए निर्धारित न्यूनतम दर पर भी आवेदन न आने पर लिया है।
हालांकि, इन दो जिलों को हटाकर भी अब तक पिछले साल के 962 करोड़ बतौर लाइसेंस फीस की अपेक्षा इस साल अब तक 970 करोड़ रुपये के प्रस्ताव विभाग के पास पहुंच चुके हैं। ऐसे में विभाग पहले से तय न्यूनतम राशि को और घटाने के मूड में नहीं है। दरअसल, सुप्रीम कोर्ट की ओर से नेशनल हाइवे किनारे से शराब ठेकों को हटाने के आदेश के बाद प्रदेश में करीब नौ सौ से ज्यादा शराब की दुकानों पर असर पड़ना था।
चूंकि, कुल करीब दो हजार में आधी दुकानें बंद होने की आशंका थी। इसी के चलते विभाग ने नए साल की बिक्री नीलामी के आधार पर करने का मन बनाया। सूबे के ज्यादातर जिलों में विभाग की ओर से तय न्यूनतम मूल्य से ज्यादा के ही टेंडर आवेदन हुए, लेकिन चंबा और किन्नौर में लाख कोशिशों के बावजूद न्यूनतम राशि के भी टेंडर अप्लाई नहीं हुए।
विभाग ने दो बार प्रयास करने के बाद अब इन दोनों जिलों में खुद से कॉरपोरेशन के जरिये शराब बेचने का निर्णय लिया है। प्रधान सचिव आबकारी एवं कराधान ओंकार शर्मा ने बताया कि दोनों ही जिलों में कॉरपोरेशन खुद शराब की बिक्री करेगा। इसके लिए कैबिनेट से पहले ही मंजूरी ली जा चुकी है।