किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) योजना के तहत किसानों को आसान और बिना गारंटी ऋण उपलब्ध कराने के सरकारी दावों के बीच बैंकिंग स्तर पर गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। नियमों के स्पष्ट प्रावधानों के बावजूद राज्य में कई बैंक किसान क्रेडिट कार्ड जारी करते समय किसानों से जमीन गिरवी रखने के बाद भी अतिरिक्त गारंटी या जमानतदार की मांग कर रहे हैं। इस पर राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) ने कड़ा संज्ञान लिया है। नाबार्ड ने इस मुद्दे को गंभीर बताते हुए कहा कि दो लाख रुपये तक के किसान क्रेडिट कार्ड ऋण पर किसी भी प्रकार की गारंटी नहीं ली जानी चाहिए। यह प्रावधान भारतीय रिजर्व बैंक और नाबार्ड के दिशा-निर्देशों में पहले से ही शामिल है। इसके बावजूद यदि बैंक शाखाएं किसानों से अतिरिक्त शर्तें थोप रही हैं तो यह नियमों का सीधा उल्लंघन है। राज्य में किसान क्रेडिट कार्ड योजना के तहत शत-प्रतिशत लक्ष्य निर्धारित किया गया है, लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति अलग है। कई किसानों को या तो अनावश्यक औपचारिकताओं के कारण ऋण से वंचित किया जा रहा है या फिर उन्हें बार-बार बैंक के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। इससे योजना का मूल उद्देश्य ही प्रभावित हो रहा है।