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मंदिरों में फूलों के चढ़ावे का प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने मांगा ब्योरा

Mon, 08 Apr 2019 12:03 PM IST
अरविन्द ठाकुर न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
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सांकेतिक तस्वीर
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मंदिरों में चढ़ने वाले फूलों से होने वाले प्रदूषण को रोकने के लिए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने नया तरीका निकाला है। इसके तहत अब फूलों से धूप व अगरबत्ती बनाने का काम किया जाएगा। शुरूआती दौर में कांगड़ा के ब्रजेश्वरी देवी मंदिर में सफल ट्रायल के बाद अब बोर्ड ने इस प्रक्रिया को सभी मंदिरों के सहयोग से विस्तृत रूप से संचालित करने की ठानी है।

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इसी के तहत बोर्ड ने भाषा, कला एवं संस्कृति विभाग को पत्र लिखकर मंदिरों में चढ़ने वाले फूलों का ब्यौरा मांगा है। दरअसल, सूबे के मंदिरों में हर रोज करीब बीस टन फूलों का चढ़ावा चढ़ाया जाता है। इन फूलों को अभी तक मंदिर प्रशासन मंदिर की सफाई के नाम पर नदियों, नालों व आसपास के खाली मैदानों में फेंक देते थे।

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इससे नदियों के प्रदूषण की समस्या पैदा हो रही थी। पीसीबी ने हाल में सीएसआईआर व एक निजी कंपनी के सहयोग से बृजेश्वरी देवी मंदिर में शुरू किए गए प्रोजेक्ट के सफल संचालन के बाद इसे विस्तृत रूप देने की कवायद शुरू की है।

इसके तहत मंदिरों से फूल इकट्ठा कर उन्हें प्रोजेक्टों को दिया जाएगा जहां हर्बल सुगंधित धूप बनाए जाएंगे। बोर्ड इन प्रोजेक्टों को लगाने व स्थापित करने में आर्थिक मदद भी करेगा। बोर्ड के सदस्य सचिव डॉ. आरके प्रूथी ने बताया कि संस्कृति विभाग से फूलों का ब्योरा मांगा गया है। इसी ब्योरे के आधार पर प्रोजेक्ट लगाने का खाका तैयार किया जाएगा।

हर्बल धूप से नहीं पहुंचेगा फेफड़ों को नुकसान
प्रूथी ने कहा कि हर्बल धूप से जहां फूलों से होने वाला प्रदूषण कम होगा। वहीं, सामान्य धूप से शरीर को होने वाले नुकसान से भी बचाव होगा। प्रूथी ने बताया कि हाल में सीएसआईआर ने एक शोध में पाया था कि बाजार में बिकने वाले सामान्य धूप शरीर को नुकसान पहुंचा रहे हैं। ऐसे में उनके खिलाफ कार्रवाई के साथ ही लोगों के लिए विकल्प भी मुहैया कराने का प्रयास किया जाएगा।
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