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22वें पायदान से पहले नंबर पर पहुंची हिमाचल पुलिस

Mon, 23 Jan 2017 11:08 PM IST
चैतन्य ठाकुर/अमर उजाला, शिमला
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डेढ़ साल पहले तक केंद्र सरकार के महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट सीसीटीएनएस (क्राइम क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्किंग सिस्टम) में हिमाचल प्रदेश 22वें पायदान पर था, लेकिन अब संयुक्त तौर पर पहले स्थान पर पहुंच गया है। प्रदेश की स्मार्ट पुलिस ने यह कर दिखाया है। प्रदेश के सभी पुलिस हेडक्वार्टर, एसपी, डीएसपी कार्यालय और थाने (विजिलेंस और सीआईडी भी शामिल) इस सिस्टम से जोड़ दिए गए हैं। 
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इतना ही नहीं देशभर में बिहार और राजस्थान को छोड़ कर हिमाचल सभी राज्यों के साथ जुड़ चुका है। अगर हिमाचल पुलिस को इन राज्यों से अपराध संबंधी या फिर कोई वेरिफिकेशन चाहिए तो मिनटों में मिल जाती है। करीब सोलह महीनों से इस प्रोजेक्ट को संभाल रहे एसओ (आईपीएस) अशोक कुमार ने कहा कि अब चौकियों को भी इससे जोड़ा जा रहा है। संयुक्त तौर पर अब हिमाचल पहले नंबर पर आ गया है। 

क्या है सीसीटीएनएस 
सीसीटीएनएस भारत सरकार के राष्ट्रीय ई गवर्नेंस प्लान के अधीन एक मिशन मोड परियोजना है। अपराध की जांच और अपराधियों की पहचान से संबंधित आईटी आधारित स्टेट ऑफ  आर्ट ट्रैकिंग प्रणाली के विकास के लिए ई-गवर्नेंस के सिद्धांत को अपनाते हुए और राष्ट्रव्यापी नेटवर्किंग आधारित संरचना के निर्माण के लिए पुलिस की कार्यकुशलता और प्रभाव को बढ़ाने के लिए एक व्यापक एवं समेकित प्रणाली का निर्माण करना सीसीटीएनएस का ध्येय है। 
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नहीं बच पाएगा अपराधी 
कोई दूसरे राज्य से अपराध करके हिमाचल में छिपा है और पुलिस के हाथ चढ़ जाता है तो उसकी वेरिफिकेशन सीसीटीएनएस के जरिए आसानी से हो जाएगी। चंद मिनटों में ही उसका आपराधिक रिकार्ड आसानी से उपलब्ध हो जाएगा। इसी तरह किसी को घर पर नौकर रखना है या फिर किसी की नौकरी की वेरिफिकेशन है, उसमें भी आसानी होगी। इतना ही नहीं इसमें ऑनलाइन शिकायत के अलावा पीड़ित अपनी एफआईआर को भी देख सकता है और साथ ही यह भी पता लगा सकता है कि उसके केस में कितनी प्रगति हुई है। 
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सीसीटीएनएस से यह हुआ आसान
-पुलिस के कार्यों को नागरिक केंद्रित बनाना और पुलिस थानों में कार्यों को स्वचालित करके पारदर्शी बनाना ।
- सिविल पुलिस के जांच अधिकारियों को टूल्स, तकनीक और अपराध की जांच एवं अपराधियों की पहचान को सरल बनाने के लिए सूचना मुहैया करना।
- विभिन्न प्रकार के अन्य क्षेत्र जैसे कानून एवं व्यवस्था यातायात प्रबंधन इत्यादि में पुलिस की कार्य प्रणाली में सुधार करना।
- पुलिस थानों, जिलों, प्रदेश मुख्यालयों और अन्य पुलिस एजेंसियों में परस्पर संवाद को सरल बनाना एवं सूचनाओं को साझा करना।
- पुलिस बलों के बेहतर प्रबंधन में वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की सहायता करना।
- नियमावली और अनावश्यक रिकॉर्ड के रखरखाव को कम करना।
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