सूबे में पिछले ढाई दशक के दौरान गाय-बैलों की संख्या में जबरदस्त गिरावट आई है। साल 1987 में हुई पशु गणना के अनुसार प्रदेश में कुल 22.45 लाख गाय-बैल थे। जबकि साल 2007 में हुई गणना में यह संख्या बढ़कर 22.69 लाख हो गई। लेकिन साल 2012 में हुई गणना में यह घटकर 21.49 लाख रह गई है।
वहीं, भैंसों की संख्या भी 1987 में 7.95 से घटकर 7.16 लाख रह गई है। प्लानिंग बोर्ड की बैठक में यह बात सामने आई है। हालांकि प्रदेश में भले ही दुधारू पशुओं की संख्या में कमी आई है। लेकिन हिमाचल प्रदेश में दूध का उत्पादन पिछले सालों में खासा बढ़ गया है। साल 2015-16 में प्रदेश में 1282 टन दूध का उत्पादन हुआ।
जबकि साल 2014-15 में यह 1172 टन था। जबकि साल 2010-11 में यह 971.40 टन था। वहीं, साल 2008-09 में यह 1026 टन था। वहीं, प्रदेश सरकार की लाख कोशिशों के बावजूद प्रदेश में भेड़ और बकरियों की संख्या में भी भारी कमी आई है। पशुपालन विभाग के आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में साल 2007 में 9 लाख भेड़ और 12.41 लाख बकरियां थी, वहीं साल 2012 की गणना में यह घटकर 8 लाख और 11 लाख रह गई।
दुधारू पशुओं के घटने और दूध उत्पादन बढ़ने पर पशुपालन विभाग के अफसरों का मानना है कि ऐसा अच्छी गुणवत्ता की दुधारू गायों और भैंसों के आयात की वजह से हो रहा है। लेकिन भेड़ और बकरियों की संख्या में कमी पर अफसर मौन हैं। अब आंकड़ों के सामने आने के बाद खुद मुख्यमंत्री ने पशुपालन विभाग को इस ओर ध्यान देने के लिए निर्देश दिए हैं।
पांच साल के सबसे निचले स्तर पर अंडे और ऊन का उत्पादन
पशुपालन विभाग के आंकड़ों की मानें तो पिछले पांच साल के दौरान प्रदेश में 201-16 में ऊन व अंडे का उत्पादन सबसे कम दर्ज किया गया है। आंकड़ों के अनुसार 2011-12 में जहां 1049 लाख अंडों का उत्पादन हुआ, वहीं साल 2015-16 में यह घटकर 811 लाख रह गया। इसी तरह ऊन का उत्पादन भी 2011-12 के 16.48 लाख किलोग्राम से घटकर 14.11 लाख किलोग्राम रह गया।