प्रदेश सरकार चहेतों को लाभ पहुंचाने के लिए पैसा पानी की तरह बहा रही है और पेंशनरों को हक देने के लिए वित्तीय संकट का रोना रोया जा रहा है। सरकार का यह दोहरा चरित्र अब सहन नहीं किया जाएगा। हिमाचल प्रदेश पेंशनर्स संयुक्त संघर्ष समिति ने सरकार को वार्ता के लिए 15 दिन का अल्टीमेटम दिया है। अगर 15 दिन में मुख्यमंत्री संयुक्त संघर्ष समिति को बैठक के लिए नहीं बुलाते तो शिमला में बड़ा आंदोलन होगा और इसके लिए प्रदेश सरकार पूरी तरह जिम्मेवार होगी। पेंशनर्स संयुक्त संघर्ष समिति ने प्रदेश सरकार के हालिया फैसलों पर कड़े शब्दों में आपत्ति जताई है। कहा है कि सरकार के पास लोक सेवा आयोग के चेयरमैन और सदस्यों की पेंशन में अभूतपूर्व वृद्धि, सेवानिवृत्त राजस्व अधिकारियों की पुनर्नियुक्ति और मंत्रियों के लिए नई गाड़ियां खरीदने के लिए तो पैसा है लेकिन लाखों पेंशनरों की वैधानिक देनदारियों का भुगतान करने के लिए पैसा नहीं है। समिति ने चेतावनी दी है कि यदि तय समय में मांगों पर बातचीत नहीं हुई तो शिमला में विधानसभा व सचिवालय के बाहर धरना-प्रदर्शन किया जाएगा। समिति के चेयरमैन सुरेश ठाकुर, महासचिव इंदर पाल शर्मा, अतिरिक्त महासचिव भूप राम वर्मा और मीडिया प्रभारी सैन राम नेगी ने कहा कि आयोग के चेयरमैन की पेंशन 8,000 से बढ़ाकर 48,000 और सदस्यों की 7,500 से 45,000 करना तथा मूल पेंशन में 6 प्रतिशत वार्षिक वृद्धि अत्यंत पक्षपातपूर्ण निर्णय है।