पेंशनरों का कहना है कि इसमें पेंशनरों की लंबित देनदारियों के लिए कोई प्रावधान नहीं किया गया। बजट में लंबित देनदारियों का कोई प्रावधान न होने के चलते पेंशनरों ने फैसला किया है कि इसके खिलाफ 30 मार्च को शिमला में विशाल प्रदर्शन किया जाएगा। पेंशनर नेताओं ने कहा कि इस प्रदर्शन में पेंशनरों के 18 संगठन शामिल होंगे। उन्होंने कहा कि सरकार ने 1 जनवरी 2016 से 31 जनवरी 2022 के बीच सेवानिवृत्त कर्मचारियों को संशोधित ग्रेच्युटी, कम्यूटेशन और छुट्टी नगदीकरण जैसे वित्तीय लाभ नहीं दिए जा रहे हैं, जबकि जनवरी 2022 के बाद सेवानिवृत्त कर्मचारियों को छठे वेतनमान के लाभ नहीं मिल रहे हैं।
उन्होंने कहा कि बजट में 13 प्रतिशत महंगाई भत्ता, 44 महीने के बकाया एरियर और लंबित मेडिकल बिलों के भुगतान के लिए भी कोई प्रावधान नहीं किया गया है। केवल क्लास-4 कर्मचारियों के बकाया का जिक्र किया गया है, लेकिन उसकी अदायगी कब होगी, यह स्पष्ट नहीं है। समिति का कहना है कि 5 मार्च को सुंदरनगर में पेंशनरों की राज्य कार्यकारिणी की बैठक हुई थी। इसमें पेंशनरों ने तय किया था कि सरकार यदि बजट में लंबित देनदारियों की घोषण नहीं करती तो पेंशनर 30 मार्च को शिमला में राज्य स्तरीय धरना-प्रदर्शन करेगी। इसके लिए प्रदेशभर में तैयारियां शुरू कर दी गई हैं।
पेंशनरों ने सरकार से मांग की है कि लंबित वित्तीय लाभों का भुगतान, महंगाई भत्ते की किश्तें, एरियर और मेडिकल बिलों के लिए विशेष बजट का प्रावधान किया जाए। हिमाचल पथ परिवहन के पेंशनरों को 70 साल की उम्र पूरी करने वालों को एरियर, मंहगाई भते की 3% की किश्त और संशोधित बेतनमान का 50,000 रुपये की पहली किश्त की अदायगी तुरंत की जाए। वहीं बिजली बोर्ड में ओपीएस बहाल की जाए। समिति ने चेतावनी दी है कि यदि पेंशनरों की मांगों को जल्द पूरा नहीं किया गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि यह निर्णय न केवल कर्मचारियों के हितों के खिलाफ है, बल्कि उनके मनोबल को भी कमजोर करता है। संघ ने लंबित 13 प्रतिशत महंगाई भत्ता जारी न करने पर भी सरकार को घेरा और इसे कर्मचारियों का अधिकार बताया। इसके अलावा 2016 यूजीसी वेतनमान के एरियर का मुद्दा भी अब तक लंबित है, जबकि अन्य राज्यों में इसका भुगतान किया जा चुका है। ऐसे में हिमाचल के शिक्षकों के साथ भेदभाव के आरोप भी सामने आ रहे हैं।
संघ ने स्पष्ट किया है कि यदि सरकार ने वेतन कटौती का फैसला वापस नहीं लिया और लंबित वित्तीय देनदारियों पर जल्द निर्णय नहीं लिया, तो विरोध और तेज किया जाएगा। हपुटा ने संकेत दिए कि यह आंदोलन केवल शिक्षकों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे कर्मचारी वर्ग का साझा आंदोलन बन सकता है। आने वाले समय में कर्मचारी संगठनों के एकजुट होने की संभावना भी जताई गई है।