हालांकि, योजनाएं दुरुस्त हो जाने के बाद इनका रखरखाव पंचायतें ही करेंगी। इनके संचालन के लिए लोगों से निर्धारित शुल्क भी ले सकेंगी। पंचायती राज संस्थाओं के बजट को 31 मार्च तक विभाग को हस्तांतरित करने को कहा गया था। ज्यादातर संस्थाओं ने पैसा लौटा दिया है। सरकार का तर्क यह है कि पंचायतें पैसा खर्च नहीं कर पा रही हैं।
यह पैसा लैप्स न हो जाए, इसलिए पैसा पंचायती राज संस्थाओं से वापस लेकर जलशक्ति विभाग को दे दिया है। कुछ पंचायती राज संस्थाओं से यह पैसा वापस नहीं आया है। जिला परिषद और पंचायत समितियों के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों जैसे एडीसी और बीडीओ को बजट 15वें वित्त आयोग के तहत दिया था।