सरकार द्वारा घोषित नीति में देरी से गुस्साए आउटसोर्स कर्मचारी महासंघ ने आत्मदाह की चेतावनी जारी कर दी है। महासंघ के अध्यक्ष धीरज चौहान ने कहा कि विधानसभा में बजट पेश करने के दौरान मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने एक महीने के भीतर आउटसोर्स कर्मियों के लिए नीति लाने का एलान किया था।
दो महीने गुजर जाने के बाद भी नीति का कोई नाम पता नहीं है। महासंघ के बैनर तले कर्मचारी आठ से 11 मई के बीच राज्य सचिवालय के बाहर प्रदर्शन करेंगे। इसके बाद भी सरकार ने नीति लाने की व्यवस्था नहीं की तो कर्मचारी आत्मदाह करने से भी गुरेज नहीं करेंगे।
पत्रकार वार्ता में चौहान ने अफसरशाही पर नीति की राह में रोड़े अटकाने का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा यदि सरकार आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए कोई नीति नहीं बना सकती तो उनके न्यूनतम वेतन को पंजाब व हरियाणा की तर्ज पर बीस से पच्चीस हजार रुपये करने की व्यवस्था करे। साथ ही उनकी सेवाओं को निरंतर जारी रखने संबंधी अधिसूचना जारी करे।
चौहान ने कहा कि 14,298 आउटसोर्स कर्मचारियों को सरकार से बड़ी उम्मीदें थी लेकिन ऐसा लगता है कि चुनाव वर्ष में सिर्फ उनको प्रलोभन दिए जा रहे हैं। आउटसोर्स कर्मचारियों को कंपनी के माध्यम से वेतन के तौर पर मामूली सी रकम दी जा रही है, जिसमें बढ़ा हिस्सा कंपनी के खाते में जा रहा है।
इसी तरह ईपीएफ के दोनों शेयर कर्मचारियों के खाते से काटे जा रहे हैं और ईएसआई सहित अन्य सुविधाएं भी नहीं दी जा रहीं। उन्होंने आरोप लगाया कि आउटसोर्स कर्मचारियों को वेतन भी समय पर नहीं मिलता और कई बार महीनों का इंतजार करना पड़ता है। कई सरकारी विभागों व निगम-बोर्ड में समय पर महीनों वेतन का इंतजार करने से कर्मचारी परेशान है।