हिमाचल प्रदेश के दस से ज्यादा निजी विश्वविद्यालयों पर फर्जी अंक तालिका बनाने वाले रैकेट का साया पड़ गया है। एक विश्वविद्यालय (विवि) की फर्जी अंक तालिका पाए जाने के बाद मिली शिकायत के आधार पर शुरू हुई पुलिस जांच में पता चला है कि एजेंट विश्वविद्यालयों की मार्कशीट फर्जी बनाकर लाखों रुपये में बेच रहे हैं। खास बात यह है कि एजेंटों ने बाकायदा मार्क्सशीट के खरीदारों से बातचीत के लिए टेलीकॉलर रखे हैं जो विश्वविद्यालय से मार्क्सशीट सत्यापित करवाने तक का ठेका लेते हैं। इसी वजह से शुरुआती दौर में विश्वविद्यालयों की भूमिका पर ही सवाल उठ रहे थे, लेकिन अब पुलिस जांच में जो नए तथ्य सामने आए हैं, उससे साबित हो रहा है कि दलाल दिल्ली, पंजाब, हरियाणा समेत कई राज्यों में फर्जी मार्क्सशीट बनाने का धंधा कर रहे हैं।