ग्राम पंचायत नारा के गांव खरूणी की रीता देवी ने आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश की है। निजी स्कूल की नौकरी कोरोना के कारण हुए लॉकडाउन के चलते छूट गई। आजीविका का साधन खत्म होने के बाद इन्होंने हिम्मत नहीं हारी और बैंक से ऋण लेकर खेतों की ओर रुख किया। रीता कुमारी ने आय के लिए एक खेत में कर्ज लेकर एलोवेरा की खेती शुरू कर दी।
रीता देवी ने कहा कि उन्होंने प्रधानमंत्री लोकल फॉर वोकल को तरजीह देते हुए एलोवेरा की खेती को चुना। आज के युग में हर्बल पैदावार की दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। लॉकडाउन में उन्हें किसी ऐसे काम की तलाश करनी चाही, जो घर में रहते हुए किया जा सके। इसलिए उन्होंने एक हर्बल कंपनी के संचालक सुनील कौशल से बात की।
उनकी सलाह पर अपने एक खेत के लिए एलोवेरा के 5 हजार पौधे मंगवाए। जून माह में रोपे गए इन एलोवेरा के पौधों की फसल अब खेत में लहलहाने लगी है। इसके साथ ही बेबी प्लांट भी निकल रहे हैं। यदि निकट भविष्य में कंपनी की ओर से इनका सही दाम मिल जाएगा तो यह उत्पाद कंपनी को बेचेंगी।