जनजातीय जिला किन्नौर में संवेदनशील बने निगुलसरी नेशनल हाईवे पांच में एक बार फिर पहाड़ दरका है। वीरवार देर रात पहाड़ी का एक बड़ा हिस्सा धंसने से सतलुज नदी के पास जा पहुंचा। पहाड़ी में भारी भूस्खलन के कारण नेशनल हाईवे का करीब 400 मीटर हिस्सा पूरी तरह ध्वस्त हो गया है, जिस कारण जिले के लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। वहीं नेशनल हाईवे प्राधिकरण नए सिरे से सड़क का निर्माण करने में जुट गया है। देश की सीमा को जोड़ने वाले नेशनल हाईवे पांच पर वीरवार रात को भारी भूस्खलन और पहाड़ी दरकने से काफी नुकसान हुआ है। एनएच की करीब 400 मीटर सड़क भूस्खलन की चपेट में आने से कट गई है।
हालांकि किन्नौर जिला प्रशासन ने एहतियात के तौर पर वीरवार देर शाम को यहां से वाहनों की आवाजाही बंद कर दी है। नेशनल हाईवे बाधित होने के कारण किन्नौर निचार, कल्पा और पूह खंड की 73 पंचायतों का संपर्क देश-दुनिया से कट गया है। वहीं जिले में इन दिनों सेब और मटर का सीजन चरम पर है, ऐसे में हजारों किसान बागवानों को अपनी नकदी फसल मंडी पहुंचाने की चिंता सताने लगी है।
सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण एनएच के ध्वस्त होने की सूचना के बाद शुक्रवार सुबह करीब छह बजे एनएच प्राधिकरण की आठ मशीनें और मजदूर सड़क का निर्माण करने में जुट गए हैं। इनमें चार मशीनें शिमला की और चार मशीनें किन्नौर की ओर से सड़क बहाली में जुट गई हैं। एक बड़ा हिस्सा ध्वस्त होने के कारण मार्ग बहाली में काफी दिन लग सकते हैं। जनजातीय विकास मंत्री जगत सिंह नेगी ने भी मौके पर पहुंचकर जायजा लिया। उन्होंने विभिन्न विभागों को मार्ग बहाली और मूलभूत सुविधाएं मुहैया करवाने के निर्देश दिए।
उधर, नेशनल हाईवे प्राधिकरण के एक्सईएन रामपुर केएल सुमन ने बताया कि निगुलसरी में पहाड़ी दरकने के कारण करीब 400 मीटर नेशनल हाईवे ध्वस्त हो गया है। यहां नए सिरे से सड़क का निर्माण किया जा रहा है। मार्ग बहाली के लिए मौके पर आठ मशीनें और दर्जनों मजदूर तैनात किए हैं, लेकिन पहाड़ी से बीच-बीच में हो रहे भूस्खलन के कारण कार्य प्रभावित हो रहा है। उन्होंने बताया कि मार्ग बहाली में करीब एक सप्ताह का समय लग जाएगा।
वर्ष 2016 में भी दरकी थी 400 मीटर पहाड़ी
गौर हो कि वर्ष 2016 में निगुलसरी में करीब चार सौ मीटर नेशनल हाईवे धंस गया था। उस दौरान भी जिले के हजारों लोगों को खासी परेशानियां झेलनी पड़ी थीं। इसके बाद 11 अगस्त 2022 में निगुलसरी के थाच में पहाड़ी से चट्टानें गिरने के कारण उसकी चपेट में एक बस और कई छोटे वाहन आ गए थे। इस हादसे में 28 लोगों की मौके पर मौत हो गई थी। इसके बाद सुरक्षा के लिहाज से इस स्थल के समीप सुरक्षा बल के जवान तैनात किए गए थे।
जिला प्रशासन की मुस्तैदी से नहीं हुई कोई हानि
प्राप्त जानकारी के मुताबिक वीरवार को निगुलसरी में हल्का-हल्का भूस्खलन शुरू हो गया था। इसके चलते यहां से गुजर रहे दो वाहन भी एक चट्टान की चपेट में आ गए थे। हालांकि इस हादसे में कोई जानी नुकसान नहीं हुआ। इसके तुरंत बाद जिला प्रशासन ने निगुलसरी में संवेदनशील बने इस स्थान पर वाहनों की आवाजाही पर पूरी तरह से रोक लगा दी थी। यदि रोक न लगती तो देर रात यहां कोई हादसा पेश आ सकता था। जिला प्रशासन की सूझबूझ और मुस्तैदी के कारण बड़े हादसे से बचा जा सका।