12 वर्ष का समय पूरा होने पर दोनों प्रेमी रात को घर से भाग गए। भागते-भागते वह सरस नामक स्थान पर पहुंचे तो पुन्नीभट्ट ने मेहलनाग से तीन वार मांगें। प्रेमिका ने कहा कि उसके घर छोड़ देने से उसके माता-पिता को पानी लाने की समस्या से जूझना पड़ेगा। तब, मेहलनाग ने दो उंगलियों से साथ लगती पहाड़ी में वार किया। जिससे पहाड़ियों से कल-कल करते दो सरोवर बहने लगे। वर्तमान समय में दोनों सरोवरों से पानी निकलता है।
दूसरा वर मांगते हुए कहा कि गांव के लोग लंबी चोटियां रखते है। उनके सिर में लगाने के लिए तेल नहीं होता है। ऐसे में मेहलनाग ने बिना बीजे ही गांव में सरसों उगने का वरदान दिया। इसके अलावा तीसरे वरदान के रूप में उन्होंने मांगा कि कोई भी उनके गांव में स्थित वंज के पेड़ों का चारा नहीं चोर सके। गांव में बिना बीजे ही उगने वाली सरसों के चमत्कार को लोग देवीय चमत्कार मानते हैं।
तो वहीं, कृषि विभाग के विशेषज्ञों की मानें तो सरसों के बीज पकने पर अपने आप भी जमीन पर गिर जाते हैं। जिससे पुन: वहां पर सरसों उगती है। कृषि विभाग के एसएमएस डॉ. ईश्वर ठाकुर ने भी सारवां में सरसों बिना बीज के उगने की बात स्वीकार की है। कहा कि फसल पकने पर बीज अक्सर जमीन पर गिर जाते हैं। जो समय के बाद फिर से अंकुरित होते हैं। ऐसा ही सारवां में भी हो सकता है।