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बिना बीजे यहां लहलहाती है सरसों की खेती, प्रेमिका ने मांगें थे तीन वरदान

Wed, 20 Jan 2021 10:27 AM IST
अरविन्द ठाकुर अमर उजाला नेटवर्क, तीसा (चंबा)
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चंबा जिले के सारवां गांव के खेतो में उगी सरसों। - फोटो : अमर उजाला
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हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले में कई अचंभित करने वाले साक्ष्य आज भी मौजूद हैं। अब इन्हें देवीय चमत्कार कहें या फिर अनजान रहस्य। जिन पर अभी भी संश्य बरकरार है। यहां बात हो रही है कि चुराह विस क्षेत्र की लेसुई पंचायत के सारवां गांव की। यहां पर बिना बीजे ही सरसों उगती है। जिसका उपयोग ग्रामीण सरसों का तेल निकालने और सब्जी बनाने के लिए करते हैं। अंचभित करने वाली बात को ग्रामीण आज भी देवीय चमत्कार ही मानते हैं। 

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परगना लौहटिकरी निवासी 75 वर्षीय बलदेव और शिक्षा विभाग से सेवानिवृत्त 67 वर्षीय नारायण स्वरूप ने बताया कि सतयुग में मेहलनाग और उनके भाई बैसुखी नाग में जब संपत्ति का बटवारा होने लगा तो उनकी मां अंजना देवी ने शर्त रखी कि जिसकी तरफ अधिक धूप निकलती है उसे मेहलवार धार का परिक्षेत्र दिया जाएगा।

मां की शर्त को जीतने के लिए मेहलनाग ने सिंधुरी रंग में कपड़े रंग-रंग कर इलाके में बिछा दिए। जिसकी भनक लगते ही अंजना देवी ने मेहलनाग को झूठ प्रदर्शित करने पर 12 वर्ष का क्षेत्र से निकाला दे दिया। मेहलनाग वहां से लौहटिकरी परगना के सारवां गांव में श्यामाभट्ट के घर पहुंचा और आश्रय लिया। श्यामा भट्ट की पुत्री पुन्नीभट्ट से मेहलनाग का प्रेम प्रसंग हो गया।

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12 वर्ष का समय पूरा होने पर दोनों प्रेमी रात को घर से भाग गए। भागते-भागते वह सरस नामक स्थान पर पहुंचे तो पुन्नीभट्ट ने मेहलनाग से तीन वार मांगें। प्रेमिका ने कहा कि उसके घर छोड़ देने से उसके माता-पिता को पानी लाने की समस्या से जूझना पड़ेगा। तब, मेहलनाग ने दो उंगलियों से साथ लगती पहाड़ी में वार किया। जिससे पहाड़ियों से कल-कल करते दो सरोवर बहने लगे। वर्तमान समय में दोनों सरोवरों से पानी निकलता है।

दूसरा वर मांगते हुए कहा कि गांव के लोग लंबी चोटियां रखते है। उनके सिर में लगाने के लिए तेल नहीं होता है। ऐसे में मेहलनाग ने बिना बीजे ही गांव में सरसों उगने का वरदान दिया। इसके अलावा तीसरे वरदान के रूप में उन्होंने मांगा कि कोई भी उनके गांव में स्थित वंज के पेड़ों का चारा नहीं चोर सके। गांव में बिना बीजे ही उगने वाली सरसों के चमत्कार को लोग देवीय चमत्कार मानते हैं।

तो वहीं, कृषि विभाग के विशेषज्ञों की मानें तो सरसों के बीज पकने पर अपने आप भी जमीन पर गिर जाते हैं। जिससे पुन: वहां पर सरसों उगती है। कृषि विभाग के एसएमएस डॉ. ईश्वर ठाकुर ने भी सारवां में सरसों बिना बीज के उगने की बात स्वीकार की है। कहा कि फसल पकने पर बीज अक्सर जमीन पर गिर जाते हैं। जो समय के बाद फिर से अंकुरित होते हैं। ऐसा ही सारवां में भी हो सकता है।
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