मुख्यमंत्री के गृह जिला में दवा खरीद के मामले पर पत्र बम से उठा सियासी विवाद थमता नजर नहीं आ रहा है। भाजपा के पूर्व मंत्री रविंद्र रवि पर इस मामले को पत्र बम के माध्यम से उठाने के आरोप लग चुके हैं। कांग्रेस भी इसे मुद्दा बनाकर सरकार को घेरने की कोशिश करती रही है। अब सीएम के करीबी सांसद रामस्वरूप का नाम भी इस मामले को उठाने में उछला है। सांसद ने मंडी जिला में हुई दवाओं की खरीद सहित कुछ अधिकारियों की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर कार्रवाई की मांग कर चुके हैं।
हालांकि, सरकार ने उन्हें इस मामले पर जांच का आश्वासन दिया और सरकार ने अभी कुछ दिन पहले मंडी जिला में तैनात एक अधिकारी का तबादला कर दिया। लेकिन चर्चा है कि इसमें उचित जांच न होने से नाखुश सांसद ने मामला केंद्र में उठाया था, जिस पर स्वास्थ्य सचिव को संसदीय विशेषाधिकार समिति ने दिल्ली तलब किया। यह भी चर्चा है कि सांसद की ओर से लिखा गया पत्र लीक हुआ है।
उधर, मंगलवार को सांसद रामस्वरूप शर्मा ने इन चर्चाओं पर विराम लगाते हुए बयान जारी कर कहा कि भ्रष्टाचार के प्रति हिमाचल सरकार का रवैया सख्त है और भ्रष्टाचारियों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा। उनके ध्यान में भ्रष्टाचार को लेकर कुछ मामले आए थे, जिसके लिए उन्होंने मुख्यमंत्री को पत्र लिखा और उसकी जांच करवाई। मुख्यमंत्री ने भ्रष्टाचार के प्रति सख्त रुख अपनाते हुए भ्रष्टाचारी अधिकारियों पर जांच कर सख्त कार्रवाई की।
आगे भी जांच प्रक्रिया को जारी रखने का आदेश जारी किया है। बतौर सांसद जब उन्हें कुछ भनक लगी तो उन्होंने इसकी सूचना तुरंत मुख्यमंत्री को लिखित तौर पर भेजी। दिल्ली तक मामला पहुंचाने की बात को सिरे से खारिज करते हुए रामस्वरूप शर्मा ने कहा कि जो उन्होंने कहना है विज्ञप्ति के माध्यम से कह चुके हैं।
यह है मामला
मंडी जोनल अस्पताल में वर्ष 2017-18 व 2018 -19 में बिना टेंडर व बिना रेट कॉन्ट्रैक्ट से 7 करोड़ 15 लाख 86728 रुपये की खरीद फरोख्त के आरोप लगे। मामला उठने के बाद जांच शुरू हुई। वित्त विभाग द्वारा मंडी जोनल अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधिकारी द्वारा की गई खरीद फरोख्त की जांच की गई। वित्त विभाग के तीन सदस्यों द्वारा यह जांच की गई।