मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू।
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ओआईएल कंपनी की ओर से राज्य के विभिन्न जलाशयों में फ्लोटिंग यानी तैरते सोलर पावर प्लांट स्थापित करने और ग्राउंड माउंटेड सौर ऊर्जा परियोजनाएं स्थापित करने की संभावनाएं तलाशी जाएंगी। यह जानकारी देते हुए मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने बुधवार को कहा कि ओआईएल पायलट आधार पर ग्रीन हाइड्रोजन और ग्रीन अमोनिया के उत्पादन के लिए भी एक संयंत्र स्थापित किया जा सकता है। हिमाचल में हरित ऊर्जा उत्पादन की अधिकता के साथ हरित हाइड्रोजन के उत्पादन के अपार अवसर हैं।
उन्होंने कंपनी के अधिकारियों को अगले सप्ताह विशेषज्ञों की एक टीम भेजकर इन परियोजनाओं को लागू करने के लिए स्थलों का निरीक्षण करने को कहा। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू की उपस्थिति में बुधवार को शिमला में राज्य में नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों यानी एनआरईएस के दोहन और विकास में सहयोग की रूपरेखा स्थापित करने के लिए प्रदेश सरकार और ऑयल इंडिया लिमिटेड यानी ओआईएल के बीच एक समझौता ज्ञापन यानी एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए।
ऊर्जा निदेशक हरिकेश मीणा ने राज्य सरकार और निदेशक संचालन पंकज कुमार गोस्वामी ने कंपनी की ओर से समझौता ज्ञापन पर साइन किए। सीएम सुक्खू ने कहा कि प्रस्तावित परियोजनाओं की प्रगति पर चर्चा के लिए 26 मई 2023 को एक समीक्षा बैठक होगी। उन्होंने कंपनी से इन परियोजनाओं को स्थापित करने में अनावश्यक देरी से बचने को कहा। कहा कि यह समझौता 31 मार्च 2026 तक हिमाचल को भारत का पहला हरित ऊर्जा राज्य बनाने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा।
हिमाचल सरकार और ऑयल इंडिया लिमिटेड के बीच सहयोग से सौर ऊर्जा, हरित हाइड्रोजन, संपीड़ित बायो-गैस, भूतापीय ऊर्जा और पवन ऊर्जा सहित विभिन्न नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत (एनआरईएस) प्रौद्योगिकी को विकसित करने पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह साझेदारी राज्य में नई परियोजनाओं की स्थापना में भी मदद करेगी और इससे रोजगार के अवसर सृजित होंगे। इससे क्षेत्र के समग्र आर्थिक विकास में बहुमूल्य योगदान मिलेगा।