प्रसिद्ध शक्तिपीठ ज्वालामुखी मंदिर में आषाढ़ मास की गुप्त नवरात्रि के साथ शनिवार को अष्टमी के दिन माता ज्वाला का प्रकटोत्सव सूक्ष्म रूप से मनाया गया। पुजारियों ने 56 भोग, प्रसाद, ऋतु फल आदि का भोग एक थाल में सजाकर विधिवत पूजा-अर्चना और तंत्रोक्त विधि से भोग लगाया। गर्भ गृह में विराजमान सभी सात ज्योतियों मां चंडी, हिंगलाज, अन्नपूर्णा, विंध्यवासिनी, महाकाली, महालक्ष्मी, महासरस्वती की विधिवत पूजा-अर्चना की गई और भोग-प्रसाद लगाया गया।
गुप्त नवरात्रि की अष्टमी पर मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ भी रही। पुजारी महासभा प्रधान पुजारी अविनेंद्र शर्मा, मंदिर न्यास सदस्य पुजारी मधुसूदन शर्मा, प्रशांत शर्मा, सौरभ शर्मा ने बताया कि आषाढ़ मास की गुप्त नवरात्रों की आषाढ़ शुक्ल पक्ष की अष्टमी के दिन वर्षों से चली आ रही परंपरा के अनुसार मां ज्वाला का प्रकटोत्सव कोरोना नियमों की पालना करते हुए सूक्ष्म रूप से मनाया गया।
श्रद्धालुओं ने प्रसाद बांटा और कई जगह सूक्ष्म चौकी का आयोजन भी किया गया। पुजारियों ने मां ज्वाला के मूल मंत्र, बटुक भैरव, गायत्री, गणपति जप व दुर्गा सप्तशती पाठ किया। रविवार को गुप्त नवरात्र का समापन पूर्णाहुति के साथ किया जाएगा। मंदिर अधिकारी निर्मल सिंह ने बताया कि हर वर्ष की तरह परंपरा के अनुसार मां ज्वाला का जन्मदिन कोविड नियमों की पालना सहित मनाया गया।