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हिमाचल: राकेश टिकैत बोले- कंपनियों से सही समझौते लागू करे सरकार, वरना गोदाम फोड़े जाएंगे

Sat, 28 Aug 2021 09:39 PM IST
अरविन्द ठाकुर अमर उजाला नेटवर्क, सोलन/सोलन/कंडाघाट

सार

राकेश टिकैत ने कहा कि हिमाचल से ही बड़ी कंपनियों ने कृषि क्षेत्र का ताना-बाना बुना। दस साल पहले अदानी ने इसकी शुरुआत हिमाचल में गोदाम बनाकर सेब खरीद से शुरू की। अब देश भर में ऐसा किया जा रहा है। अब दो महीने किसानों के लिए कीमतें कम कर देश में 10 महीने जनता को लूटा जा रहा है। 
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किसान नेता राकेश टिकैत - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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 सेब के रेट गिराने को साजिश करार देते हुए भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष राकेश टिकैत ने कहा है कि हिमाचल प्रदेश की राजधानी जितनी ठंडी है, इसे वह गरम करना भी जानते हैं। इसके दिल्ली बनते देर नहीं लगेगी। यहां की सरकार कान खोलकर सुन ले, ये जो कंपनियों से समझौते हुए हैं, उन्हें ठीक से लागू करे, नहीं तो गोदाम फोडे़ जाएंगे तो फिर कहना नहीं। किसान को बस एक फसल की कुर्बानी देनी पड़ेगी। रेट इसलिए गिरे, क्योंकि अदानी ने यहां गोदाम खोले हैं। ये बातें टिकैत ने शनिवार को प्रेस क्लब शिमला में पत्रकार वार्ता में कहीं।

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राकेश टिकैत ने कहा कि हिमाचल से ही बड़ी कंपनियों ने कृषि क्षेत्र का ताना-बाना बुना। दस साल पहले अदानी ने इसकी शुरुआत हिमाचल में गोदाम बनाकर सेब खरीद से शुरू की। अब देश भर में ऐसा किया जा रहा है। अब दो महीने किसानों के लिए कीमतें कम कर देश में 10 महीने जनता को लूटा जा रहा है। हिमाचल प्रदेश में रेट गिरने नहीं देंगे। संयुक्त मोर्चा इस मुद्दे को उठाएगा। 
टिकैत बोले, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि वर्ष 2022 में किसानों की आमदनी दोगुनी हो जाएगी।

2022 के लिए तीन महीने रह गए हैं। मोदी सरकार को बड़ी-बड़ी कंपनियां चलाती हैं। अदानी ने हिमाचल प्रदेश में सेब के रेट 16 रुपये कम कर दिए। जब सरकार पूछती है कि नुकसान क्या है तो किसान बिल में जो कांट्रैक्ट फार्मिंग है, वह यही तो है। किसान को कमजोर किया जा रहा है, ताकि वह अपनी जमीन बेचने को मजबूर हो जाए। सलाह-मशविरा करके ही वह अगला लाइन-ऑफ एक्शन तय करेंगे। प्रदेश का किसान किसी का बंधुआ मजदूर नहीं है, उसे अपनी बात उठानी आती है। यूथ जब ट्विटर पर सक्रिय होगा और ट्रैक्टर चलाना सीखेगा तो यहां आंदोलन होगा।
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यहां गांवों में जो एनजीओ बने हैं, उनसे बात करेंगे। वर्ष 2011 में जो सेब का रेट था, आज भी वही है। क्या देश में महंगाई नहीं बढ़ी, क्या पेट्रोल-डीजल, उर्वरकोें और कीटनाशकों की कीमतेें नहीं बढ़ीं। प्रदेश में सेब का न्यूनतम समर्थन मूल्य मिलना चाहिए। यहां से माल बंगलूरू जा रहा है तो परिवहन सब्सिडी दी जाए। उन्होंने कहा कि 5 सितंबर को मुजफ्फरनगर में सम्मेलन होगा। इसमें अगली रणनीति बनाएंगे। एक सवाल के जवाब में टिकैत ने कहा कि हम चुनाव नहीं लड़ेंगे। किसान चुनाव नहीं लड़ता। उन्होंने कहा, किसान बिलों का भरसक विरोध किया जाए। 

सेब मंडी सोलन में नारेबाजी से रोकने पर भड़के टिकैत
 किसान नेता राकेश टिकैत की सोलन सेब मंडी में आढ़ती के साथ बहस हो गई। टिकैत शनिवार सुबह जब शिमला जा रहे थे तो बीच में वह सोलन सेब मंडी में कुछ समय रुके। समर्थकों ने उनके स्वागत के लिए नारेबाजी की तो एक सेब आढ़ती वहां पहुंचा और नारेबाजी बंद करने समेत गाड़ी को सब्जी मंडी से बाहर निकालने के लिए कहा। इस पर टिकैत ने कहा कि यहां आंदोलन भी होगा और नारेबाजी भी। यह किसी के बाप की जमीन नहीं है। वहीं टिकैत के समर्थन में अन्य कार्यकर्ता भी आढ़ती को वहां से बाहर करने लगे तो दोनों पक्षों में धक्कामुक्की भी हुई। इस बीच पुलिस ने मौके पर पहुंचकर मामला शांत किया।
 

अडानी-अंबानी ग्रुप से सतर्क हो जाएं हिमाचली किसान: टिकैत

 किसान नेता राकेश टिकैत का हिमाचल पहुंचने पर किसान संगठनों ने सोलन और कंडाघाट में उनका स्वागत किया। सोलन में टिकैत ने सेब मंडी का निरीक्षण किया और छोटी मंडियों पर किसानों-बागवानों से अपने उत्पाद देने का आग्रह किया। टिकैत कंडाघाट में किसानों और पत्रकारों से रूबरू हुए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी दावा कर रहे हैं कि 2022 में किसानों की आय दोगुनी हो जाएगी। अगर वह ऐसा करते हैं तो पीएम का समर्थन करेंगे। हैं। उन्होंने कहा कि देश में एग्रीकल्चर मिनिस्ट्री नहीं है जिसके चलते किसानों को लूटा जा रहा है। 18 मंत्रालय कृषि को देखते हैं लेकिन सभी ठीक तरीके से कार्य नहीं कर रहे। उन्होंने किसानों से आग्रह किया कि हिमाचल का किसान एकजुट हो जाएं वर्ना अडानी-अंबानी ग्रुप किसानों को खा जाएगा। उन्होंने कहा कि यदि जरूरत पड़ी तो प्रदेश में भी आंदोलन किया जाएगा। इस मौके पर कांग्रेस के जिलाध्यक्ष शिव कुमार, पूर्व जिलाध्यक्ष राहुल ठाकुर, नगर परिषद सोलन के पूर्व अध्यक्ष कुल राकेश पंत, हिमाचल किसान सभा के सोलन जिलाध्यक्ष प्यारे लाल, भारतीय किसान यूनियन के राज्य अध्यक्ष अनिंदर सिंह नॉटी, सचिव मनीष ठाकुर और यूनियन के पदाधिकारी मौजूद रहे।  

फसलों को मिले न्यूनतम समर्थन
कंडाघाट के पडौथा में यूनियन की प्रदेश और जिला इकाई के पदाधिकारियों सहित कई स्थानीय लोगों ने उनका स्वागत किया। उन्होंने कहा कि पहाड़ के किसान यूनियन का अंग हैं जिनकी लड़ाई लड़ी जाएगी। किसानों को सभी फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य मिलना चाहिए। पहाड़ के किसानों की लड़ाई संयुक्त किसान यूनियन मजबूती से लड़ेगी। इसमें टमाटर, सेब और अन्य फसल उत्पादकों को आने वाली समस्याएं शामिल होंगी। टमाटर और सेब से आधारित उद्योग लगाए जाएं उन्होंने कहा कि सरकार को सरकारी क्षेत्र में टमाटर और सेब जैसी फसलों पर आधारित उद्योग लगाकर किसानों से सरकारी तौर पर फसलें खरीदनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार को किसानों की फसलों को देश की मंडियों तक पहुंचाने के लिए ट्रांसपोर्ट सब्सिडी देनी चाहिए। इससे छोटे-बड़े सभी किसानों को राहत मिल सकेगी। 

 

टिकैत नहीं जानते हिमाचल के संस्कार : कंवर

कृषि मंत्री वीरेंद्र कंवर ने कहा कि राकेश टिकैत हिमाचल प्रदेश में पर्यटक बनकर आए हैं। पर्यटक के रूप में उनका स्वागत है। लेकिन उन्हें न तो हिमाचल प्रदेश का कोई ज्ञान है और न ही यहां के संस्कारों का। कंवर ने कहा कि टिकैत का अभद्र भाषा का प्रयोग करना दुर्भाग्यपूर्ण है, जो उनकी ओछी मानसिकता का स्पष्ट प्रमाण है।

मंत्री ने कहा कि राज्य में मंडियों की व्यवस्था सुदृढ़ है। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने मंडियों के लिए हाल ही में 250 करोड़ रुपये दिए हैं, जिससे एपीएमसी का विस्तार किया जा रहा है। टिकैत को कुछ लोग अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षा के चलते हिमाचल लाए हैं, जो कभी सफल नहीं होगी।
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राकेश टिकैत अपने राज्य में जाकर अराजकता फैलाएं : विक्रमादित्य

शिमला ग्रामीण के कांग्रेस विधायक विक्रमादित्य सिंह ने कहा है कि हिमाचल के किसान और बागवान अपनी आवाज उठाने में सक्षम हैं। कांग्रेस पार्टी और वह उनके पीछे खड़े हैं। उन्हें बाहर के लोगों की और खासकर ऐसे लोग जिनको हिमाचल की सभ्यता और संस्कृति के बारे में कुछ मालूम नहीं है, उनकी जरूरत नहीं है। राकेश टिकैत अपने राज्य में जाकर अराजकता फैलाएं। हिमाचल को उनकी जरूरत नहीं है।
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