हिंदू-मुस्लिम भाईचारे का प्रतीक चंबा का ऐतिहासिक मिंजर मेला रविवार को शुरू हो गया। कोरोना महामारी के कारण पहली बार लोगों के बिना शोभायात्रा हुई। 400 साल बाद इस बार सिर्फ रस्म अदायगी के लिए ही मेले का आयोजन हो रहा है। चंबा के मिर्जा परिवार की ओर से भगवान रघुनाथ को मिंजर अर्पित करने के साथ ही मेले का शुभारंभ हुआ। इस बार सांस्कृतिक संध्याएं नहीं होंगी। कुंजडी मल्हार का लाइव प्रसारण किया जा रहा है।
मेले के शुभारंभ पर विस उपाध्यक्ष हंसराज बतौर मुख्यातिथि मौजूद रहे, जबकि सदर विधायक पवन नैयर ने विशेष अतिथि के रूप में शिरकत की। इससे पहले मिर्जा परिवार, मंदिर के पुजारी, जिला प्रशासन और नगर परिषद चंबा के पदाधिकारियों की मौजूदगी में नप कार्यालय चंबा से शोभायात्रा लक्ष्मीनाथ मंदिर के लिए निकली।
कोरोना संक्रमण के चलते इस बार शोभायात्रा में कम संख्या में ही लोग शामिल हुए। शहर के जिन मोहल्लों से शोभायात्रा गुजरनी थी, उन चारों वार्डों को भी सील कर रखा था। शहर के मंदिरों में पूजा और मिंजर अर्पित करने के बाद चौगान मैदान तक शोभायात्रा निकाली गई। यहां मुख्यातिथि ने ध्वजारोहण किया। मेले का रस्मी तौर पर समापन दो अगस्त को होगा।
बैंड बाजा नहीं, कुंजड़ी मल्हार गायन हुआ
रविवार को नप कार्यालय से बिना ढोल की थाप के निकली मिंजर मेले की शोभायात्रा जब लक्ष्मीनाथ मंदिर चंबा पहुंची तो वहां विस उपाध्यक्ष ने प्रशासन को बैंड बाजा पार्टी को बुलाने के लिए कहा। मगर बैंड बाजा पार्टी उपलब्ध न होने पर कुंजड़ी मल्हार गायन ही करवाया गया। बीस मिनट तक लक्ष्मीनाथ मंदिर परिसर में इंतजार के बाद मिंजर चढ़ाई गई।