किब्बर वाइल्ड लाइफ सेंक्चुरी: लाहौल में एक दशक में दो गुना बढ़ गए आईबैक्स
Sun, 30 Jan 2022 01:42 PM IST
अरविन्द ठाकुर
अशोक राणा, संवाद न्यूज एजेंसी, केलांग (लाहौल-स्पीति)
सार
करीब एक दशक पहले तक जानवरों के शिकार के कारण इनकी तादाद घटने लगी थी। लेकिन स्थानीय स्तर पर खुद लोगों ने इनके शिकार पर प्रतिबंध लगा दिया। उसके बाद बर्फानी तेंदुआ और आईबैक्स की संख्या बढ़ने लगी है। वाइल्ड लाइफ टूरिज्म बढ़ने से लोगों को आय का अतिरिक्त विकल्प मिल गया है।
स्पीति घाटी में वाइल्ड लाइफ टूरिज्म तेजी से विकसित हो रहा है। पिछले करीब एक दशक के भीतर किब्बर वाइल्ड सेंक्चुरी में आईबैक्स की संख्या करीब दोगुना तक बढ़ गई है। बर्फानी तेंदुआ और अईइबैक्स जैसे दुर्लभ प्रजाति के जानवरों को करीब से देखने के लिए देश-विदेश के सैलानी स्पीति का रुख कर रहे हैं। पर्यटकों के आने से स्थानीय लोगों की आय भी बढ़ी है।
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इन जानवरों पर शोध करने वाले शोधार्थी भी किब्बर वाइल्ड लाइफ सेंक्चुरी का रुख कर रहे हैं। करीब एक दशक पहले तक जानवरों के शिकार के कारण इनकी तादाद घटने लगी थी। लेकिन स्थानीय स्तर पर खुद लोगों ने इनके शिकार पर प्रतिबंध लगा दिया। उसके बाद बर्फानी तेंदुआ और आईबैक्स की संख्या बढ़ने लगी है। वाइल्ड लाइफ टूरिज्म बढ़ने से लोगों को आय का अतिरिक्त विकल्प मिल गया है।
चिचम और किब्बर के हर घर में होम स्टे खुले हैं। जबकि युवा वर्ग पारंपरिक व्यंजन तैयार कर अच्छी खासी कमाई कर रहे हैं। वाइल्ड लाइफ फोटोग्राफर गोंपो छेरिंग बताते हैं कि हिमालयन आईबैक्स को साइबेरियन आईबैक्स की एक उपप्रजाति माना जाता है। किब्बर में यह 4200 मीटर की ऊंचाई पर पाए जाते हैं। एक व्यस्क आईबैक्स का वजन 90 किलो तक होता है।
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वाइल्ड लाइफ कंजर्वेशन पर काम कर रहे वैज्ञानिक डॉ. यशवीर भटनागर का मानना है कि हिमाचल में आईबैक्स की तादाद कहीं घट रही है तो कहीं बढ़ रही है। हालांकि किब्बर वाइल्ड लाइफ सेंक्चुरी में निश्चित तौर आईबैक्स की संख्या बढ़ रही है। वाइल्ड लाइफ विशेषज्ञ शिव कुमार का कहना है कि मादा आईबैक्स मई व जून में बच्चों को जन्म देती है।