उत्तराखंड के चमोली जिला में भयंकर बाढ़ ने किन्नौर में आई आपदा को ताजा कर दिया है। 31 जुलाई 2000 को ग्लेशियरों के पिघलने से आई बाढ़ से सतलुज नदी का जलस्तर बढ़ गया थ, जिससे किन्नौर जिले में भी काफी तबाही मची थी।
इस बाढ़ ने किन्नौर के खाब से लेकर चौरा तक 18 पुल, 12 झूला पुल और राष्ट्रीय उच्च मार्ग-5, बिजली, सिंचाई व पेयजल योजनाओं को तहस-नहस कर दिया था। बाढ़ में कई लोगों की मौत भी हो गई थी। किन्नौर जिला पूरे देश से छह महीने के लिए कट गया था।
हेलीकाप्टर से लोगों को खाद्य सामग्री पहुंचाई गई थी। वहीं, स्पीति घाटी में 2005 में पारच्छू नदी भी तबाही मचा चुकी है। एसडीएम कल्पा डा. अवनिंद्र कुमार शर्मा ने बताया कि चमोली में आपदा के बाद किन्नौर में अलर्ट जारी कर दिया है।