दशहरा उत्सव में न बुलाने को लेकर नाराज हुए देवी-देवताओं के आह्वान पर सोमवार को भगवान रघुनाथ के दरबार में देव संसद (छोटी जगती) होगी। जगती में जिले भर के देवी देवताओं के निशान, गूर, पुजारी और कारदार शामिल होंगे। भगवान रघुनाथ की ओर से जिले के करीब 300 से अधिक देवी देवताओं को निमंत्रण पत्र भेजे गए हैं।
दशहरा में देवी देवताओं को न बुलाने पर देवताओं को क्या रुख रहेगा। इस पर सरकार, जिला प्रशासन के साथ देव समाज की नजर रहेगी। जगती (देव पूछ) देवता धूमल नाग हलाण, देवता हरिनारायण, देवता मेहा नारायण, देवता वीरनाथ, देवता फलाणी नारायण और देवी कोटली के आदेश पर हो रही है। वहीं नाराज देवता देवता धूमल नाग, देवता वीरनाथ और देवता मेहा नारायण ने दशहरा समाप्ति के अगले दिन एक नवंबर को रघुनाथ के अस्थायी शिविर ढालपुर में छिद्रा की थी।
इस दौरान देवताओं ने कहा कि अगर 15 दिन के भीतर जगती करवानी होगी। ऐसे में भगवान रघुनाथ की ओर जिला के देवी देवताओं के कारदारों को भेजे गए निमंत्रण में देवी देवताओं के जगती में घंटी, धड़छ या निशान के साथ शामिल होने का निमंत्रण दिया था। भगवान रघुनाथ के मुख्य छड़ीबरदार महेश्वर सिंह ने कहा कि जगती 16 नवंबर की सुबह साढ़े नौ बजे से शुरू होगी।
गूर के माध्यम से बात रखेंगें देवी-देवता
कुल्लू। किसी आपात स्थिति में होने वाली देवी-देवताओं की देव संसद को जगती कहा जाता है। यह दो प्रकार की होती है, एक बड़ी बड़ी और दूसरी छोटी जगती। बड़ी जगती नग्गर में होती है, जबकि छोटी जगती भगवान रघुनाथ के दरबार में की जाता है। ऐसे में इस देवी-देवता अपने निशान व प्रतिनिधि के साथ भाग लेंगे। इसमें अभी देवी देवताओं से पूछ की जाएगी और संबंधित मसले पर अपना पक्ष रखेंगे।