जिला परिषदों और पंचायत समितियों को यह राशि 15 वें वित्तायोग ने हिमाचल को ग्रामीण विकास के लिए पंचायतों, पंचायत समितियों और जिला परिषदों को जारी की थी। पंचायतें तो अपनी हिस्से की राशि का खर्च लगातार करती रहती हैं।
हिमाचल प्रदेश की जिला परिषदें और पंचायत समितियां ग्रामीण विकास के लिए दी गई करोड़ों की राशि खर्च नहीं कर पा रही हैं। प्रदेश की पंचायती राज संस्थाओं को अभी तक कुल 409 करोड़ की राशि दो किस्तों में मिल चुकी है। इनमें से 15 फीसदी राशि जिला परिषदों और 15 फीसदी राशि पंचायत समितियों को जारी की गई है। जिला परिषदों और पंचायत समितियों को यह राशि 15 वें वित्तायोग ने हिमाचल को ग्रामीण विकास के लिए पंचायतों, पंचायत समितियों और जिला परिषदों को जारी की थी।
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पंचायतें तो अपनी हिस्से की राशि का खर्च लगातार करती रहती हैं। जिला परिषदों और पंचायत समितियों ने अभी तक इस राशि को विकास कार्य पर खर्च नहीं किया है। 14 वें वित्तायोग ने हिमाचल के जिला परिषदों और पंचायत समितियों को ग्रामीण विकास के लिए धनराशि देनी बंद कर दी थी। जिला परिषदें और पंचायत समितियां गांवों के विकास के लिए पंचायतों के माध्यम से काम कराने लगी थी।
क्यों आ रही है धनराशि खर्च करने में मुश्किल
पंचायतें अपने स्तर पर काम कराने के लिए निविदाएं भी आमंत्रित कर लेती हैं और उनके पास तकनीकी स्टाफ भी मौजूद है। जबकि जिला परिषदों और पंचायत समितियों के पास तकनीकी स्टाफ की कमी है। विकास कार्यों के टेंडर लगाने में दिक्कतें आ रही हैं।
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पांच लाख के काम को नहीं मांगे ई-टेंडर
जिप और पंस को विकास कार्य कराने में आसानी हो, इसके लिए सरकार अब पांच लाख से कम के काम के लिए ई-टेंडर नहीं मांगेगी। पांच लाख से ज्यादा के ई-टेंडर लगेंगे। छोटे काम स्थानीय युवक मंडल, महिला मंडल या अन्य स्वयं सहायता समूह से कराए जा सकेंगे।
पंचायती राज मंत्री वीरेंद्र कंवर ने कहा कि कि 15वें वित्तायोग की धनराशि जिला परिषद और पंचायत समितियां विकास में खर्च नहीं कर पाई हैं। अब पांच लाख से कम के साधारण टेंडर मांगे जाएंगे। तकनीकी स्टाफ भी जुटाया जा रहा।