जम्मू-कश्मीर के लिए 28400 करोड़ रुपये के औद्योगिक पैकेज पर केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय की मुहर लगने के बाद हिमाचल प्रदेश के उद्यमियों ने भी सरकार से करों में रियायत की मांग करनी शुरू कर दी है। लघु उद्योग भारती ने प्रदेश सरकार से बजट में निवेश के ऋण पर ब्याज की छूट के साथ जीएसटी पर प्रोत्साहन देने की मांग की है।
जम्मू-कश्मीर के लिए केंद्र सरकार ने औद्योगिक पैकेज की घोषणा की है। यह योजना पहली अप्रैल से 16 साल तक प्रभावी रहेगी। जोन ए में आने वाले शहरों में पूंजीगत निवेश पर तीस व ग्रामीण क्षेत्रों में पचास फीसदी तक अनुदान देने की घोषणा की है। निवेश में ऋण पर ब्याज व कार्यशील पूंजी पर ब्याज में छूट देने के साथ जीएसटी में प्रोत्साहन सौ फीसदी तक माफ करने घोषणा की है।
लघु उद्यमियों ने कहा कि अगर इतनी छूट जम्मू-कश्मीर में दी है तो यहां के लघु उद्यमी भी पलायन कर जाएंगे। केंद्र सरकार जम्मू-कश्मीर में जीएसटी के लिए दस साल के लिए छूट दे रही है। पहली अप्रैल से ऑनलाइन पंजीकरण शुरू होगा। 2024 तक जो उद्योग आवेदन करेंगे, उन्हें ही इस योजना का लाभ मिलेगा। प्रदेश में दो दशक बाद भी सरकार लघु उद्यमियों के लिए ठोस नीति नहीं बना पाई है। सरकार को चाहिए लघु उद्यमियों के लिए सिंगल विंडो तैयार करें, जहां केवल लघु उद्यमियों के एक ही स्थान पर सभी विभागीय कार्य हो सकें।
ये बोले लघु उद्योग भारती के पदाधिकारी
लघु उद्योग भारती के प्रदेश अध्यक्ष राजीव कांसल, फार्मा विंग के प्रदेश अध्यक्ष चरणजीत सिंह ठाकुर, महा सचिव विकास सेठ, दविंद्र सिंह राणा, बद्दी के अध्यक्ष रामकिशन, कालाअंब के संजय सिंगला व पालमपुर के नीरज गुप्ता ने कहा कि लघु उद्यमियों को अपने काम कराने में काफी कठिनाई आ रही है कोरोना काल में लघु उद्यमियों ने अपने उद्योग जैसे-तैसे चलाकर रखे, लेकिन प्रदेश सरकार से उन्हें कोई राहत नहीं मिली है। अभी भी लघु उद्योग पटरी पर नहीं लौटे हैं। सरकार को बजट में लघु उद्यमियों को राहत देनी चाहिए।