अब तक हुए 500 तबादलों में 205 आईएएस, आईपीएस, आईएफएस, एचएएस के अलावा विभागों के कर्मचारी शामिल हैं। सचिवालय ब्रांचों में 70 कर्मचारियों और अधिकारियों को इधर से उधर किया गया है।
लोक निर्माण विभाग, बिजली बोर्ड, वन, सिंचाई एवं जन स्वास्थ्य विभाग, शिक्षा सहित अन्य विभागों में अब ढाई सौ के करीब अधिकारी व कर्मचारियों को ताश के पत्तों की तरह फेंटा गया है। इतने बड़े पैमाने पर तबादलों में जमकर राजनीतिक सिफारिशें चलने के आरोप भी लग रहे हैं।
राजनीतिक दखल की वजह से कई अधिकारियों के तबादले निरस्त कर उन्हें मनचाहे स्टेशन देने के लिए तबादला सूची में संशोधन हुआ। धड़ाधड़ तबादलों पर पूर्व आईएएस अधिकारी कंवर शमशेर सिंह का मानना है कि सरकार बदलने के साथ अफसरों के तबादले भी होते रहे हैं। लेकिन बड़ी बात अफसरों से काम लेना है जिस पर ज्यादा ध्यान होना चाहिए।
नाती वाले विभागों पर अफसरों की पकड़ है या नहीं इस पर फोकस होना चाहिए।पूर्व आईपीएस अधिकारी आईडी भंडारी कहते हैं, ‘सरकार की अफसरशाही पर पकड़ होनी चाहिए। अधिकारियों की आपसी रंजिश के चलते अफसरों को बदलना ठीक नहीं है, इसका विकास कार्यों पर असर पड़ता है।
अफसर की रुचि और कार्यक्षमता देखकर ही तबादले होने चाहिए।’ मुख्यमंत्री और मंत्रियों के कार्यालय से 150 डीओ नोट जारी हो गए हैं। इनमें अधिकांश डीओ लेटर वेबसाइट पर अपलोड हो चुके हैं। साइट पर डीओ नोट का पता करने के लिए मंत्री कार्यालय में कोड नंबर दिए गए हैं।