हिमाचल प्रदेश राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय शिमला की ओर से 21वीं सदी में कानून एवं न्याय में निर्देशात्मक बदलाव, चुनौतियां एवं अवसर विषय पर होटल पीटरहाफ में तीन दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया है।
सम्मेलन का शुभारंभ शुक्रवार शाम हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश एवं कुलपति हिमाचल प्रदेश राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय न्यायमूर्ति संजय करोल ने किया।
करोल ने कहा कि सामाजिक विचारों और दृष्टिकोण में सकारात्मक बदलाव कानून के तहत विभिन्न व्यवस्थाओें से संभव हुआ है। देश में विभिन्न विकास क्रमों और सामाजिक सुधारों को कानून के माध्यम से ही सुनिश्चित किया गया है।
संवेदनशील मसलों पर मानक तय कर कानून ने कमजोर और असहाय वर्ग के हितों का संरक्षण किया है। सती प्रथा, बाल विवाह, दहेज प्रथा की रोकथाम, बेटियों को जायदाद में हिस्सेदारी और छुआछूत को अवैध करार देने के अलावा बहुत से ऐसे बिंदु हैं, जिसमें कानून के माध्यम से नियम बनाकर इन्हें लागू किया गया है।
आठ बिंदुओं पर केंद्रित है सम्मेलन
तीन दिवसीय इस सम्मेलन में विधि से संबंधित विभिन्न पहलुओं व विषयों पर चर्चा होगी। उन्होंने कहा कि आज के परिपेक्ष में यह विषय चुनौतीपूर्ण है, जिस पर चर्चा करना अनिवार्य है।
कानूनी शिक्षण संस्थानों का दायित्व न केवल योग्य विधिवक्ताओं की अगली पीढ़ी तैयार करना है बल्कि सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक मुद्दों में विधिक विचारों को भी कायम रखना है। इस अवसर पर उन्होंने गुरविंद्र सिंह द्वारा लिखित पुस्तक और विश्वविद्यालय की स्मारिका का विमोचन किया।
सम्मेलन के उद्घाटन पर प्रदेश उच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति त्रिलोक चौहान, न्यायमूर्ति विवेक ठाकुर सहित न्यायिक प्रणाली के अन्य संस्थानों के पदाधिकारी व बाहर से आए प्रतिनिधियों के अलावा राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के शिक्षक, छात्र, अधिकारी एवं कर्मचारी मौजूद रहे।
विश्वविद्यालय के उप कुलपति प्रो. एससी रैणा ने बताया कि सम्मेलन में कानून एवं न्याय में निर्देशात्मक बदलाव की विभिन्न स्थितियों पर विचार करने के लिए सामाजिक संदर्भों के बदलाव में व्यक्तिगत कानून,
न्याय प्रशासन व न्यायालय की अनुपालना, पर्यावरण क्षय व सामाजिक न्याय एवं अन्याय, मैरिटल रेप मैट्रीमोनियल ऑब्लीगेशन एंड डिगनिटी ऑफ वुमन सहित कुल आठ विषय सम्मेलन में चर्चा का केंद्र बिंदु रहेंगे।
महिलाओं के तुष्टिकरण पर जताई चिंता
विशिष्ट अतिथि के रूप में सम्मेलन में उपस्थित राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष रेखा सिंह ने न्यायिक प्रणाली व न्यायालयों में महिलाओं के तुष्टिकरण व उनके प्रति अनुचित व्यवहार पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने विश्वास जताया कि तीन दिवसीय इस सम्मेलन में महिला तुष्टिकरण और संबद्ध विषयों पर भी विस्तार से चर्चा होगी।
गे।