हिमाचल प्रदेश के कृषि, जनजातीय विकास एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री रामलाल मारकंडा ने बौद्ध धर्मगुरु दलाईलामा को भारत रत्न देने की वकालत की है। शुक्रवार को मारकंडा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इस संबंध में पत्र लिखा है। उन्होंने कहा है कि तिब्बत पर चीन के आक्रमण के बाद से दलाईलामा भारत में रहकर बौद्ध धर्म और भारतीय संस्कृति के लिए काम करते आ रहे हैं।
मारकंडा की ओर से लिखे गए पत्र में कहा गया है कि भारत में 600 ई. पूर्व बौद्ध धर्म एवं बौद्ध संस्कृति का जन्म हुआ था। अब इसे दलाईलामा आगे बढ़ा रहे हैं। इनके प्रयासों से ही बौद्ध धर्म जीवित रहा है। भारत में प्राचीन बौद्ध धर्म एवं संस्कृति के महत्व को पुनर्जीवित करने में उन्होंने अहम योगदान दिया है।
मंत्री ने कहा, धर्मगुरु ने अपने विदेशी दौरों में भी बौद्ध धर्म के प्रचार के साथ-साथ भारत की समृद्ध संस्कृति का प्रचार किया है। आज विश्व भर में उन्हें बुद्ध और महात्मा गांधी की तरह शांति दूत के रूप में पहचाना जाता है। विश्व में शांति फैलाने के लिए उनके द्वारा किए जा रहे प्रयासों के कारण उन्हें विश्व शांति नोबल पुरस्कार से भी नवाजा गया है।
मारकंडा बोले- दलाईलामा भारत के अनमोल रत्न
मारकंडा ने कहा कि दलाईलामा को महान कार्यों के लिए भारत रत्न प्रदान किया जाना तर्क संगत है। वह नि:संदेह भारत रत्न हैं और भारत का अनमोल रत्न है।