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मंडी लैंडस्लाइड हादसा: सामने आई प्रशासन की बड़ी लापरवाही

Tue, 15 Aug 2017 03:08 PM IST
अखिलेश महाजन/अमर उजाला, कोटरोपी (मंडी)
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समय सुबह सात बजे। कोटरोपी हादसे में शिकार 22 यात्रियों के शव नाले में एक सीढ़ीनुमा खेत में पड़े हुए हैं। रातभर ये शव बारिश में भीगते रहे। सफेद कफन में लिपटी लाशों से बदबू आना शुरू हो गई है।
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जंगली जानवरों के डर से जम्मू का एक परिवार अपने बेटे के शव की रखवाली कर रहा है। चंद पुलिस वाले भी वहां पर हैं। लेकिन अभी तक शवों को कोटरोपी स्कूल मैदान में पहुंचाने का काम शुरू नहीं हुआ है।

ताकि पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंपे जा सकें। परिचालक सतपाल के भाई व्यवस्था को कोस रहे हैं। कह रहे हैं कि उनके भाई के शरीर का ऊपर का हिस्सा गायब है। उनकी मां सतपाल का पूरा शरीर लाने के लिए कह रही हैं। वे इधर-उधर भटक रहे हैं। 
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सरकारी अमले की बड़ी लापरवाही

कोटरोपी हादसे ने प्रभावित परिवारों को तो गहरे जख्म दिए ही हैं, लेकिन सरकारी अमले की लापरवाही उनके दर्द को और बढ़ा रही है। रात को बारिश के चलते भले ही रेस्क्यू ऑपरेशन रोक दिया गया था, लेकिन खुले में पड़ी लाशों को तो सुरक्षित स्थान पर लाया जा सकता था।

परिजनों और चंद पुलिसवालों के साथ लाशों को बारिश में यूं ही भीगता छोड़ दिया। सुबह सात बजे तक यही आलम रहा। 9.10 बजे तक चिकित्सक पोस्टमार्टम वाले स्थल में नहीं पहुंचे थे।

दो परिवार इंतजार करते दिखे। चिकित्सकों के आने के बाद ही पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों के हवाले हुए। इसके बाद करीब 9.50 पर आर्मी और एनडीआरएफ की टीमें ने आपदा प्रबंधन शुरू किया।

सुबह कब क्या हुआ

07..00 बजे:  कोटरोपी नाला और चंद पुलिस वाले शवों के ढेर
07:10 बजे : पुलिस ने शुरू किया लाशों को उठाने का सिलसिला
09.00 बजे  : कोटरोपी स्कूल मैदान में पोस्टमार्टम के लिए डॉक्टर नहीं
09.10 बजे : चिकित्सक पोस्टमार्टम के लिए पहुंचे 
09.20 बजे : आर्मी के जवान घटनास्थल पर पहुंचे
09.50 बजे : एनआरडीएफ टीम पहुंची घटनास्थल पर
05:00 बजे : राहत कार्य जारी था, लेकिन शव बरामद नहीं।
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बिफरे परिजन; पोकलेन खराब, 11.30 पर हुआ काम शुरू

पोकलेन से शव ढूंढने का काम दूसरे दिन सुबह आठ बजे तक शुरू हो जाना चाहिए था जो नहीं हुआ। सतपाल के परिजन अपने आंखों के तारे की आधी लाश निकालने का इंतजार करते दिखे।

जब उन्हें पता चला कि मशीन खराब है और उसके बिना शवों को निकालना संभव नहीं है तो वे बिफर गए।

बार-बार अफसरों को फोन करने के बाद स्पष्ट उत्तर न मिलने से परिजनों ने हंगामा शुरू कर दिया। इसके बाद करीब 11.30 बजे पोकलेन को दुरुस्त कर मलबे से शव खोजने का काम शुरू किया गया।
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