विश्व शांति और भाईचारे के लिए हजारों बौद्ध अनुयायियों ने करीब 15 हजार फीट ऊंचे पवित्र ड्रिलबुरी पर्वत की परिक्रमा पूरी की। इस धार्मिक परिक्रमा की अगुवाई अवतारी लामा कुंगा रिम्पोछे ने की। परिक्रमा में सिक्किम, लद्दाख, किन्नौर, नेपाल, तिब्बत और विदेशी बौद्ध श्रद्धालु शामिल हुए।
यंग द्रुगपा एसोसिएशन के बैनर तले लगातार दूसरी बार इस धार्मिक परिक्रमा का आयोजन किया गया। इस परिक्रमा को पूरी करने के लिए श्रद्धालुओं ने करीब 25 किमी का सफर तह किया। इसमें ड्रिलबुरी पर्वत की करीब 9 किमी सीधी चढ़ाई भी शामिल है।
एसोसिएशन के अध्यक्ष जंगपो वर्चिपा, सदस्य दोरजे लारजे, सुशील, तंजिन, सोंटु, मोनू, कन्नू और सोनम लामा ने बताया कि एक साल पहले इस परिक्रमा की शुरुआत हुई है। बताया कि भविष्य में बारालाचा दर्रा से तुपछिलिंग मठ तक करीब 200 किमी लंबी गेस्क्योर (पवित्र परिक्रमा) शुरू करने की योजना बनाई है।
कुंगा रिम्पोछे ने बताया कि इस तरह की परिक्रमा कर बौद्ध अनुयायी दुनिया में शांति और भाईचारा के लिए महात्मा बुद्ध से कामना करते हैं। इस परिक्रमा में 2 साल की बच्ची से लेकर 75 साल तक के बुजुर्गों ने हिस्सा लिया। परिक्रमा कारदंग मठ से शुरू होकर सिला गोंपा में जाकर समाप्त हुई।