जीएसटी से सेब की पैकिंग महंगी हो गई है। बागवानों को कॉर्टन और वारदाना पहले के मुकाबले दोगुने से अधिक कर देकर खरीदना पड़ रहा है। वारदाना खरीद में 12 फीसदी जीएसटी देना पड़ रहा है। इस पर बागवानों को पांच की जगह 12 फीसदी जीएसटी देना पड़ रहा है। जीएसटी लागू होने से बागवानों पर पहले की अपेक्षा 7 फीसदी कर लगा है।
ऐसे में बागवानों को और आर्थिक बोझ झेलना पडे़गा। घाटी के बागवान चमन ठाकुर, चुनीलाल, अमन ठाकुर, राजेश ठाकुर, लाल चंद, महेश शर्मा, अरुण ठाकुर आदि ने कहा कि अब 12 फीसदी जीएसटी का भुगतान कर कॉर्टन और वारदाना खरीदना पड़ रहा है। हिमाचल किसान सभा के उपाध्यक्ष देवराज नेगी ने कहा कि कॉर्टन और वारदाना पर 12 फीसदी जीएसटी देना पड़ रहा है।
यह बागवानों के हित में नहीं है। फलोत्पादक मंडल कुल्लू के अध्यक्ष राजगीर महंत ने बताया कि कुल्लू समेत सूबे के किसानों-बागवानों को अधिक कर देना पड़ रहा है। पूर्व बागवानी मंत्री सत्यप्रकाश ठाकुर के अनुसार इससे बागवानों पर सेब पैकिंग के लिए अतिरिक्त खर्च बढ़ जाएगा।
इससे पता चलता है कि केंद्र सरकार बागवानों की कितनी हितैषी है। उधर, आबकारी एवं कराधान विभाग के सहायक आयुक्त डॉ. रमेश शर्मा के अनुसार कॉर्टन या वारदाना खरीद पर बागवानों को नियमानुसार 12 फीसदी जीएसटी चुकाना होगा।