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GST से महंगी हो गई सेब की पैकिंग, अब कॉर्टन खरीद पर इतने फीसदी टैक्स

Mon, 14 Aug 2017 03:39 PM IST
अमी चंद भंडारी/अमर उजाला, खराहल (कुल्लू)
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जीएसटी से सेब की पैकिंग महंगी हो गई है। बागवानों को कॉर्टन और वारदाना पहले के मुकाबले दोगुने से अधिक कर देकर खरीदना पड़ रहा है। वारदाना खरीद में 12 फीसदी जीएसटी देना पड़ रहा है। इस पर बागवानों को पांच की जगह 12 फीसदी जीएसटी देना पड़ रहा है। जीएसटी लागू होने से बागवानों पर पहले की अपेक्षा 7 फीसदी कर लगा है।
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ऐसे में बागवानों को और आर्थिक बोझ झेलना पडे़गा। घाटी के बागवान चमन ठाकुर, चुनीलाल, अमन ठाकुर, राजेश ठाकुर, लाल चंद, महेश शर्मा, अरुण ठाकुर आदि ने कहा कि अब 12 फीसदी जीएसटी का भुगतान कर कॉर्टन और वारदाना खरीदना पड़ रहा है। हिमाचल किसान सभा के उपाध्यक्ष देवराज नेगी ने कहा कि कॉर्टन और वारदाना पर 12 फीसदी जीएसटी देना पड़ रहा है।

यह बागवानों के हित में नहीं है। फलोत्पादक मंडल कुल्लू के अध्यक्ष राजगीर महंत ने बताया कि कुल्लू समेत सूबे के किसानों-बागवानों को अधिक कर देना पड़ रहा है। पूर्व बागवानी मंत्री सत्यप्रकाश ठाकुर के अनुसार इससे बागवानों पर सेब पैकिंग के लिए अतिरिक्त खर्च बढ़ जाएगा।
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इससे पता चलता है कि केंद्र सरकार बागवानों की कितनी हितैषी है। उधर, आबकारी एवं कराधान विभाग के सहायक आयुक्त डॉ. रमेश शर्मा के अनुसार कॉर्टन या वारदाना खरीद पर बागवानों को नियमानुसार 12 फीसदी जीएसटी चुकाना होगा।
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एक लाख खरीद पर चुकाने होंगे 12 हजार

पहले ही ओलावृष्टि और अंधड़ के कारण बागवानों को काफी नुकसान झेलना पड़ रहा है। अब जीएसटी की मार से भी आर्थिक बोझ उठाना पड़ रहा है। नियमानुसार एक लाख रुपये की पेटियां खरीदने पर अब बारह हजार रुपये जीएसटी चुकाना होगा। पहले यह करीब पांच हजार रुपये था। 

एक कॉर्टन पर 20 रुपये कीमत बढ़ी 
जीएसटी लागू होने से एक कॉर्टन पर करीब बीस रुपये की बढ़ोतरी हुई है। एक ट्रक सेब पेटी में बागवान को करीब 35 सौ रुपये अतिरिक्त खर्चा वहन करना होगा। सब्जी मंडी में लगी बोली में केवल सेब के ही दाम मिलते हैं। इसमें अतिरिक्त पैकिंग का खर्चा नहीं दिया जाता है।

छोटे बागवानों पर होगा अधिक असर
वारदाना खरीद पर 12 फीसदी जीएसटी लगने का सीधा असर छोटे बागवानों पर होगा। पहले ही अधिक खर्च के बावजूद कम फसल के चलते बागवान बैकफुट पर हैं। अब पैकिंग का खर्चा बढ़ने से इनकी चिंता बढ़ गई है। मझोले और बड़े बागवानों पर जीएसटी का अधिक फर्क नहीं होगा।
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