प्रदर्शन को संबोधित करते हुए ऑल इंडिया पावर फेडरेशन के पैट्रन इंजीनियर सुनील ग्रोवर, जॉइंट एक्शन कमेटी के सह-संयोजक हीरा लाल वर्मा और अन्य वक्ताओं ने कहा कि प्रस्तावित विधेयक बिजली क्षेत्र को निजी कंपनियों के हवाले करने की दिशा में कदम है। कमेटी के संयोजक इंजीनियर लोकेश ठाकुर ने कहा कि विधेयक में एक ही क्षेत्र में कई वितरण लाइसेंस देने, वायर और सप्लाई व्यवसाय को अलग करने तथा लागत आधारित टैरिफ लागू करने जैसे प्रावधान शामिल हैं।
उनका आरोप है कि इससे सार्वजनिक क्षेत्र की बिजली कंपनियां कमजोर होंगी और आम उपभोक्ताओं पर आर्थिक बोझ बढ़ेगा। हिमाचल प्रदेश जैसे कठिन भौगोलिक परिस्थितियों वाले राज्य में बिजली वितरण का निजीकरण जनता के हितों के खिलाफ होगा।
इससे बोर्ड की व्यवस्था, कर्मचारियों की नौकरी की सुरक्षा और पेंशनरों की सामाजिक सुरक्षा पर भी असर पड़ सकता है। कर्मचारी संगठनों ने चेतावनी दी कि यदि केंद्र सरकार ने बिजली (संशोधन) विधेयक वापस नहीं लिया तो देशभर के कर्मचारी संगठन मिलकर आंदोलन को और तेज करेंगे। उन्होंने कहा कि बिजली जैसी बुनियादी सेवा को मुनाफे के लिए निजी कंपनियों को सौंपने का हर स्तर पर विरोध किया जाएगा।