वीरभद्र सरकार ने उत्तराखंड मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष रहे जस्टिस (रि) जगदीश भल्ला को हिमाचल प्रदेश मानवाधिकार आयोग का अध्यक्ष और पूर्व हिमाचल प्रदेश लोक सेवा आयोग अध्यक्ष केएस तोमर को सदस्य तैनात करने का निर्णय लिया है। प्रदेश में करीब बीस साल पहले मानवाधिकार आयोग का गठन लोगों के मानवाधिकारों की रक्षा के लिए किया गया था।
लेकिन पिछले करीब बारह साल से यह आयोग पूरी तरह निष्क्रिय था। करीब बारह साल पहले आयोग में आखिरी अध्यक्ष जस्टिस रिटायर्ड एनके जैन थे। जस्टिस जैन के कार्यकाल समाप्त होने के बाद से आयोग के अध्यक्ष का पद खाली था। सरकार ने इसके बाद लोकायुक्त के अधीन ही मानवाधिकार आयोग का संचालन किया।
जुलाई 2017 में मंत्रिमंडल ने आयोग को मजबूत करने के लिए एक चेयरमैन और एक सदस्य की नियुक्ति की व्यवस्था की। साथ ही आयोग में विभिन्न स्तर के 68 पद सृजित कर उन्हें भरने की प्रक्रिया को भी मंजूरी दी। इसके बाद अध्यक्ष और सदस्य की चयन प्रक्रिया की कार्यवाही चली। चयन प्रक्रिया को लेकर विवाद भी हुए।
अध्यक्ष व सदस्य की नियुक्ति को लेकर प्रक्रिया शुरू होने के साथ ही प्रशासनिक अफसरों ने इसमें अड़ंगा लगाना शुरू कर दिया। आखिरकार आयोग के अध्यक्ष पद पर पूर्व चीफ जस्टिस भल्ला और सदस्य पद पर लोकसेवा आयोग अध्यक्ष तोमर के नाम पर सरकार ने मुहर लगा दी गई।
हिमाचल हाईकोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश रहे हैं जस्टिस भल्ला
सरकार द्वारा राज्य मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष के लिए नामित रिटायर्ड जस्टिस जगदीश भल्ला ने नैनीताल से स्कूल की पढ़ाई करने के बाद लखनऊ विश्वविद्यालय से 1971 में में कानून की डिग्री हासिल की। डीएवी कॉलेज लखनऊ के विधि विभाग के विभागाध्यक्ष रहे भल्ला 1995 में इलाहाबाद उच्च न्यायालय में जज के तौर पर नियुक्त हुए।
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रहने के बाद 2008 में वह हिमाचल प्रदेश के मुख्य न्यायाधीश नियुक्त हुए और यहां से स्थानांतरित होने पर वह राजस्थान उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश रहे। वहीं, आयोग के सदस्य पद पर मनोनीत हुए केएस तोमर हाल ही में प्रदेश लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष पद से रिटायर हुए हैं।