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हिमाचल: छह विश्वविद्यालयों में शिक्षकों की आयोग से होगी भर्ती, वित्त सचिव करेंगे निगरानी, विधानसभा में विधेयक

Tue, 01 Sep 2026 07:20 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।

सार

 छह सरकारी विश्वविद्यालयों में भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने और वित्तीय अनुशासन मजबूत करने के लिए राज्य सरकार ने मंगलवार को विधानसभा में हिमाचल प्रदेश राज्य विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक-2026 पेश किया। 
 
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हिमाचल प्रदेश विधानसभा शिमला। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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हिमाचल प्रदेश के छह सरकारी विश्वविद्यालयों में भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने और वित्तीय अनुशासन मजबूत करने के लिए राज्य सरकार ने मंगलवार को विधानसभा में हिमाचल प्रदेश राज्य विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक-2026 पेश किया। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने विधेयक सदन के पटल पर रखा। संशोधन विधेयक लागू होने के बाद छह विश्वविद्यालयों में शिक्षकों की सीधी भर्ती हिमाचल प्रदेश लोक सेवा आयोग (एचपीपीएससी) के माध्यम से होगी। वहीं, गैर-शिक्षण पदों पर सीधी भर्ती हिमाचल प्रदेश राज्य चयन आयोग (एचपीआरसीए) या सरकार की ओर से अधिसूचित किसी अन्य भर्ती एजेंसी के जरिये की जाएगी। भर्ती प्रक्रिया विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के निर्धारित मापदंडों के अनुसार होगी।

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इन विवि पर लागू होगा प्रस्तावित संशोधन
प्रस्तावित संशोधन हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय शिमला, सरदार पटेल विश्वविद्यालय मंडी, हिमाचल प्रदेश तकनीकी विश्वविद्यालय हमीरपुर, डॉ. यशवंत सिंह परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय सोलन, चौधरी सरवण कुमार कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर और अटल आयुर्विज्ञान एवं अनुसंधान विश्वविद्यालय नेरचौक पर लागू होगा। संशोधन के तहत सभी छह विश्वविद्यालयों की वित्त समितियों के अध्यक्ष राज्य सरकार के वित्त सचिव होंगे। सरकार का कहना है कि इससे विश्वविद्यालयों के वित्तीय मामलों में निगरानी मजबूत होगी और वित्तीय अनुशासन सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी। नए पदों के सृजन, मौजूदा पदों के उन्नयन, सीधी भर्ती एवं पदोन्नति के नियम बनाने और कर्मचारियों के वेतन एवं भत्तों के पुनरीक्षण से जुड़े सभी वित्तीय प्रस्ताव पहले वित्त समिति के समक्ष रखे जाएंगे। समिति की सिफारिश के बाद कार्यकारी परिषद या प्रबंधन बोर्ड इन मामलों पर विचार करेगा। इसके बाद प्रस्ताव अंतिम मंजूरी के लिए राज्य सरकार को भेजा जाएगा। भर्ती यूजीसी के निर्धारित मापदंडों के अनुसार होगी।

कुप्रबंधन और अनुशासनहीनता के मामलों के बाद उठाया कदम
विधेयक के उद्देश्यों एवं कारणों में सरकार ने कहा है कि विश्वविद्यालयों में वित्तीय कुप्रबंधन और अनुशासनहीनता के मामले सामने आने के बाद संशोधन आवश्यक हो गया था। नए प्रावधानों से लोक निधियों के उचित उपयोग के साथ विश्वविद्यालयों में निष्पक्षता, पारदर्शिता और योग्यता आधारित भर्ती सुनिश्चित करने का प्रयास किया जाएगा। सरकार के अनुसार, विधेयक लागू होने से राज्य के खजाने पर कोई अतिरिक्त वित्तीय भार नहीं पड़ेगा। नए प्रावधान मौजूदा सरकारी तंत्र के माध्यम से लागू किए जाएंगे।
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सदन में इन छह विधेयकों को पेश किया, दो वापस भी लिए
हिमाचल प्रदेश विधानसभा में छह विधेयकों को पेश किया गया। यह हिमाचल प्रदेश राज्य विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक 2026, शिमला की सड़कों का उपयोग करने वालों तथा पैदल चलने वालों के लिए (लोक सुरक्षा और सुविधा) संशोधन विधेयक, हिमाचल प्रदेश माल और सेवा कर (संशोधन) विधेयक 2026, हिमाचल प्रदेश युद्ध पुरस्कार (संशोधन) विधेयक 2026, भारतीय स्टांप (हिमाचल प्रदेश द्वितीय संशोधन) विधेयक 2026 और हिमाचल प्रदेश पंचायती राज (द्वितीय संशोधन) विधेयक 2026 हैं। इन्हें विधेयकों को आगामी दिनों में पारित करने का प्रस्ताव किया जाएगा। इनमें से कुछ पर चर्चा भी संभव है। इससे पहले स्टांप ड्यूटी से जुड़े 2023 और 2026 में पारित दो विधेयकों को वापस लेने का भी प्रस्ताव पारित किया गया। 
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