वैज्ञानिक अनुसंधान और सहयोग का परिणाम
यह उल्लेखनीय उपलब्धि हिमाचल प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय के डॉ. जी.सी. नेगी कॉलेज ऑफ वेटरनरी एंड एनिमल साइंसेज के वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं के वर्षों के अथक अनुसंधान का परिणाम है। विशेषज्ञों ने कई वर्षों तक इस नस्ल की शारीरिक बनावट, व्यवहार, आनुवंशिक विशेषताओं और इसके पारंपरिक उपयोग का विस्तृत अध्ययन और दस्तावेजीकरण किया। इसी गहन शोध प्रक्रिया के बाद ही इन दोनों श्वानों का राष्ट्रीय स्तर पर पंजीकरण संभव हो सका।
इस परियोजना में प्रोफेसर शिवानी कटोच ने अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जबकि पशुपालन विभाग ने भी इस संरक्षण अभियान को आगे बढ़ाने में सक्रिय सहयोग प्रदान किया। विभाग के तत्कालीन सचिव रितेश चौहान ने इस महत्वपूर्ण पहल को प्रशासनिक स्तर पर आवश्यक समर्थन देकर इसे साकार करने में मदद की।
प्रेरणा और भविष्य की उम्मीदें
विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल हिमालयन गद्दी कुत्ते की पहचान को न केवल राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत करेगी, बल्कि यह अन्य राज्यों को भी अपनी स्वदेशी पशु नस्लों के संरक्षण और वैज्ञानिक संवर्धन के लिए प्रेरित करेगी। यह एक महत्वपूर्ण संदेश है कि कैसे स्थानीय ज्ञान और आधुनिक विज्ञान के संगम से हमारी समृद्ध जैव विविधता को संरक्षित किया जा सकता है। यह उपलब्धि भारत की विविध पशुधन विरासत के महत्व को रेखांकित करती है।