खंडपीठ ने आदेश में कहा है कि बार-बार देखा गया है कि आबकारी विभाग की ओर से न तो जवाब समय पर दायर किया जा रहा है और न ही समय बढ़ाने के बाद। विभाग 3 महीने के बाद जवाब दाखिल कर रहा है। इससे न केवल अदालत को असुविधा होती है बल्कि उन मामलों के निर्णय लेने में भी बाधा आती है, जिनमें करोड़ों रुपये लगे होते हैं। वर्तमान मामले में प्रतिवादी सरकार सहित विभाग को 24 अप्रैल को नोटिस जारी किए गए। उसके बाद विभाग की ओर से 1, 8 और 29 मई को जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा गया। शुक्रवार को भी जवाब दाखिल करने के लिए और समय की मांग की गई। न्यायालय ने इसी मामले में यह आदेश जारी किए हैं।