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हिमाचल: भूमि अधिग्रहण मामलों में हाईकोर्ट ने जिला कोर्ट का फैसला रखा बरकरार

Wed, 09 Jul 2025 05:00 AM IST
Krishan Singh संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला

सार

 प्रदेश हाईकोर्ट ने सिरमौर की रेणुका बांध परियोजना के लिए अधिग्रहीत भूमि के मामलों में जिला न्यायाधीश सिरमौर की ओर से 9 अगस्त 2018 को पारित अवार्ड को बरकरार रखा है।
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हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने सिरमौर की रेणुका बांध परियोजना के लिए अधिग्रहीत भूमि के मामलों में जिला न्यायाधीश सिरमौर की ओर से 9 अगस्त 2018 को पारित अवार्ड को बरकरार रखा है। इसमें भूमि का मुआवजा 7 लाख प्रति बीघा निर्धारित किया गया था। न्यायाधीश बिपिन चंद्र नेगी की अदालत ने निर्देश दिए हैं कि यदि अवार्ड की राशि जमा नहीं की गई है तो अपीलकर्ता आदेश के आठ सप्ताह की अवधि के भीतर पूरी रकम न्यायालय की रजिस्ट्री में जमा करें।

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कोर्ट के इस निर्णय के बाद रेणुका बांध परियोजना से प्रभावित होने वाले अन्य भूमि मालिकों के लिए भी मुआवजे के निर्धारण में आसानी हो गई है।

न्यायालय में एचपीपीसीएल यानी हिमाचल प्रदेश पावर काॅरपोरेशन लिमिटेड और अन्य की ओर से पारित अवार्ड को चुनौती दी गई थी, जिसे अदालत ने खारिज कर दिया। उल्लेखनीय है कि प्रतिवादियों की ओर से रेणुका बांध और उसके जलमग्न क्षेत्र के निर्माण के लिए यह भूमि अधिग्रहीत की गई थी। अधिसूचना जारी होने के बाद 20 नवंबर 2008 को अधिनियम की धारा 4 के तहत भूमि अधिग्रहण की कार्रवाई शुरू हुई थी। भूमि अधिग्रहण कलेक्टर (एलएसी) ने भूमि के वर्गीकरण और प्रकृति के अनुसार 1 अक्तूबर 2012 को सामान्य अवार्ड संख्या 704 पारित किया और अधिग्रहित भूमि के लिए मुआवजे का अवार्ड दिया।

भूमि मालिक एलएसी की ओर से दिए गए मुआवजे से असंतुष्ट थे और उन्होंने अधिनियम की धारा 18 के तहत जिला न्यायाधीश सिरमौर के समक्ष इस संबंध में याचिकाएं दायर कीं। याचिकाओं में मुआवजे राशि में वृद्धि की मांग की गई थी। जिला न्यायाधीश ने 9 अगस्त, 2018 के अवार्ड के माध्यम से भूमि की प्रकृति और वर्गीकरण की परवाह किए बिना अधिग्रहित भूमि का बाजार मूल्य एक समान दर पर 7 लाख प्रति बीघा पुनर्निर्धारित किया और सभी वैधानिक लाभों के साथ इसे बढ़ाया। प्रतिवादियों की ओर से इसी अवार्ड के खिलाफ हाईकोर्ट में कई अपीलें दायर कीं, जिनमें अवार्ड को कम करने की मांग की गई थी।

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