हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने सजायाफ्ता कैदी को पैरोल पर रिहा न करने पर कड़ा संज्ञान लिया है। न्यायाधीश वीरेंद्र सिंह ने प्रधान सचिव गृह को नोटिस जारी कर दो दिनों में जवाब तलब किया है। अदालत ने डीजीपी (जेल), उपायुक्त कुल्लू और एसपी नाहन जेल को नोटिस जारी किया है। मामले की सुनवाई 19 जनवरी को निर्धारित की गई है।
दुष्कर्म के जुर्म में 20 वर्षों की कठोर कारावास की सजा काट रहे लक्की ने हाईकोर्ट के समक्ष याचिका दायर की है। याचिका में कहा गया है कि राज्य सरकार और जेल प्रशासन की ओर से उसे पैरोल पर रिहा करने की छूट नहीं दी जा रही है। जबकि, अन्य कैदियों को पैरोल पर रिहा किया जा रहा है। दलील दी गई कि वह पिछले 11 वर्षों से दुष्कर्म के जुर्म में 20 वर्षों की कठोर कारावास की सजा आदर्श जेल नाहन में काट रहा है।
घर पर उसकी बीबी, 12 साल की बेटी और बुजुर्ग पिता है। उनसे मिलने के लिए उसने वर्ष 2018 में पैरोल के लिए आवेदन किया था। जेल प्रशासन ने यह कहकर आवेदन को खारिज कर दिया कि उसे पैरोल पर रिहा करने के लिए राज्य सरकार ने सिफारिश नहीं की है। आरोप लगाया गया है कि राज्य सरकार पैरोल पर रिहा करने के मामलों में मनमानी करती है। किस कैदी को पैरोल दी जानी है या नहीं राज्य सरकार की मनमानी पर निर्भर करता है।
दलील दी गई कि पैरोल सजायाफ्ता कैदी का सांविधानिक अधिकार है, जिसे बिना सोचे समझे खारिज नहीं किया जा सकता। अदालत को बताया गया कि याचिकाकर्ता का जेल में आचरण संतोषजनक है। उसे इस तरह के मामले में सजा नहीं हुई है जिसमें पैरोल स्वीकृत नहीं की जा सकती। याचिकाकर्ता ने अदालत से गुहार लगाई है कि राज्य सरकार और जेल प्रशासन को आदेश दिए जाए कि उसे पैरोल पर रिहा किया जाए।