प्रदेश हाईकोर्ट ने मंडी जिले के सरकाघाट में अवैध निर्माणों के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई न किए जाने पर नाराजगी जताई है। मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने प्रशासन के ढुलमुल रवैये पर सरकाघाट के एसडीएम को अगली सुनवाई पर व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश होने का आदेश दिया है।
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने मंडी जिले के सरकाघाट में अवैध निर्माणों के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई न किए जाने पर नाराजगी जताई है। मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने प्रशासन के ढुलमुल रवैये पर सरकाघाट के एसडीएम को अगली सुनवाई पर व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश होने का आदेश दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि यदि एसडीएम अगली सुनवाई से पहले इन अवैध निर्माणों के खिलाफ सकारात्मक कार्रवाई करते हैं और उसकी स्टेटस रिपोर्ट अदालत में दाखिल कर देते हैं, तो उन्हें व्यक्तिगत रूप से पेश होने की आवश्यकता नहीं होगी।
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मामले की अगली सुनवाई 18 नवंबर को होगी। अदालत ने कहा कि प्रशासन की ओर से पेश की जा रही रिपोर्टों से कोई भरोसा नहीं जगता, बल्कि नया हलफनामा स्थिति को और खराब करता है। 30 अप्रैल 2026 को दाखिल पिछले हलफनामे में 46 अवैध निर्माणों की बात कही गई थी, लेकिन 14 अगस्त 2026 को एसडीएम की ओर से दाखिल की गई नई स्टेटस रिपोर्ट में इस संख्या को घटाकर 42 कर दिया गया। खंडपीठ ने टिप्पणी की कि दोनों हलफनामों में कुल 71 मामलों की पहचान की बात कही गई है। हालांकि, शेष मामलों को लेकर कुछ स्पष्टीकरण जरूर दिए गए हैं, लेकिन जो 42 अवैध निर्माण स्पष्ट रूप से चिह्नित हैं, उनके खिलाफ जमीनी स्तर पर कार्रवाई का कोई रिकॉर्ड पेश नहीं किया गया है।