परवाणू से कैथलीघाट तक फोरलेन को दिसंबर 2023 तक पूरी तरह से चालू कर दिया जाएगा। यह जानकारी नेशनल हाईवे अथॉरिटी ने हाईकोर्ट के समक्ष दी है। अदालत को बताया गया कि परवाणू से कैथलीघाट तक सभी अवैध कब्जों को हटा दिया गया है। अब फोरलेन के निर्माण में कोई बाधा नहीं है। डंपिंग साइट निर्धारित करने के लिए अदालत ने वन विभाग, नेशनल हाईवे अथॉरिटी, उपायुक्त सोलन, शिमला और संबंधित विभागों को आदेश दिए कि वह महाधिवक्ता के साथ बैठक करें।
न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान और न्यायाधीश वीरेंद्र सिंह की खंडपीठ ने 11 जनवरी 2023 तक ताजा रिपोर्ट तलब की है। कालका-शिमला फोरलेन के निर्माण में देरी होने पर प्रदेश हाईकोर्ट ने कड़ा संज्ञान लिया है। अदालत ने परवाणू से कैथलीघाट तक सभी अवैध कब्जों को पुलिस की मौजूदगी में हटाने के आदेश दिए थे। पिछले आदेशों के तहत हाईकोर्ट ने उपायुक्त सोलन की कार्यशैली पर टिप्पणी की थी। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का कालका-शिमला फोरलेन ड्रीम प्रोजेक्ट था।
लेकिन, पिछले तीन सालों से कैथलीघाट-ढली के हिस्से का निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पाया है। पहले भूमि अधिग्रहण के चलते काम लटका रहा। कालका से कैथलीघाट तक निर्माण कार्य अवैध कब्जों के कारण पूरा नहीं हो रहा है। कैथलीघाट से ढली तक 28.4 किमी लंबे फोरलेन के हिस्से का कार्य दो पैकेजों में तय किया गया है। इस पर 3,716.26 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। दूसरे पैकेज के फोरलेन निर्माण के लिए 1956.26 करोड़ बजट की स्वीकृति दी गई है।