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हाईकोर्ट ने जताई कड़ी नाराजगी, अब नपेंगे बड़े कब्जाधारक, दो हफ्ते की मोहलत दी

Fri, 22 Jun 2018 09:59 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
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वन भूमि पर कब्जे कर सेब बगीचे लगाने वाले रसूखदारों पर कोई कार्रवाई न होने पर हाईकोर्ट ने सरकार पर कड़ी नाराजगी दिखाई है। न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान और न्यायाधीश सीबी बारोवालिया की खंडपीठ ने वन महकमे के प्रधान सचिव को आदेश दिए कि दो सप्ताह में बड़े कब्जाधारकों पर कार्रवाई को अंजाम दिया जाए, क्योंकि अब कोई बहाना नहीं चलेगा।

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खंडपीठ ने कहा कि कब्जाधारकों पर क्या कार्रवाई की गई, हल्फनामा देकर रोजाना इसकी रिपोर्ट भी कोर्ट को दी जाए। मामले की अगली सुनवाई 11 जुलाई को होगी। कोर्ट ने यह भी चेतावनी दी कि अगर 11 जुलाई तक कब्जाधारकों पर शिकंजा नहीं कसा गया तो वन और राजस्व विभाग के अधिकारी अवमानना जैसी कार्रवाई को भी तैयार रहें।

कहा- खुद डिमार्केशन करे वन विभाग

कोर्ट ने कोटगढ़ कुमारसैन के डीएफओ की ओर से कब्जों की सही जानकारी न देने पर उनके खिलाफ उचित कार्रवाई किए जाने की चेतावनी दी। हाईकोर्ट ने वन भूमि को कब्जों से मुक्त करवाने में डिमार्केशन के कारण हो रही देरी पर कड़ा संज्ञान लेते हुए आदेश दिया था कि वन विभाग खुद डिमार्केशन करे।

आदेश के बावजूद वन विभाग अपनी भूमि छुड़ाने के लिए ढीला रवैया अपना रहा है। अब न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान और सीबी बारोवालिया की खंडपीठ ने कोर्ट में उपस्थित प्रदेश वन विभाग के अधिकारियों को आदेश दिए कि वे बिना देरी और बिना कोई बहाना बनाए दो सप्ताह के भीतर रसूखदार कब्जाधारकों पर कार्रवाई करें।
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हल्फानामा देकर बताएं प्रतिदिन क्या किया

कोर्ट ने वन विभाग के प्रधान सचिव को हल्फानामा देकर यह बताने को कहा कि प्रतिदिन कब्जाधारकों पर क्या कार्रवाई की। कोर्ट ने वन भूमि पर अवैध कब्जों के इस गोरखधंधे के असली दोषी विभाग के संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों को ठहराया।

गौर हो कि पिछली सुनवाई के दौरान कोर्ट के ध्यान में लाया गया था कि वन विभाग छोटे-मोटे कब्जाधारकों की सूची सौंप कर हाईकोर्ट की आंखों में धूल झोंकता आ रहा है।

कुछ लोगों ने मुख्य न्यायाधीश व एमिक्स क्यूरी को पत्र लिख कर बड़े कब्जाधारकों के नाम बताए जिनका वन विभाग की कब्जाधारकों की सूची में कोई जिक्र नहीं होता था। इसी पर हाईकोर्ट का रुख कड़ा हुआ है।
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