सरकार ने 6 अगस्त, 1984 को हिमाचल प्रदेश हिंदू पब्लिक रिलीजियस इंस्टीट्यूशंस एंड चैरिटेबल इंडोवमेंट्स एक्ट बनाया था। अधिनियम 1984 की धारा 17 के तहत मंदिर चढ़ावा केवल मंदिरों में स्वच्छ पेयजल, शौचालय, श्रद्धालुओं के ठहरने के लिए सराय, पार्किंग, पुजारियों के प्रशिक्षण कार्यक्रमों और श्रद्धालुओं को अन्य सुविधाएं उपलब्ध करवाने पर खर्चा जा सकेगा।
इसके अलावा मंदिर क्षेत्र के तहत छोटे मंदिरों के जीर्णोद्धार और रोजाना पूजा-अर्चना कार्यों, वेदों, गीता, रामायण आदि धार्मिक ग्रंथों समेत धार्मिक पुस्तकालयों और शिक्षण संस्थानों पर खर्च किया जा सकता है।
पूर्व एडीजीपी ने अपनी अर्जी में कहा है कि दिल्ली के अक्षरधाम मंदिर, जेएंडके में माता वैष्णोदेवी, आंध्रप्रदेश के बालाजी और तिरुपति समेत देश भर के अन्य मंदिरों में श्रद्धालुओं के लिए आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हैं।
हिमाचल में बज्रेश्वरी माता मंदिर कांगड़ा, चामुंडा माता, ज्वालाजी माता मंदिर, चिंतपूर्णी माता, नयनादेवी मंदिर, हणोगी माता मंदिर, तारादेवी माता, भीमाकाली, श्री त्रिलोकीनाथ, शूलिनी माता, सिद्धपीठ बाबा बालक नाथ आदि समेत राज्य के प्रसिद्ध 36 मंदिरों में श्रद्धालुओं को पर्याप्त सुविधाएं नहीं मिल रही हैं।
अपील में कहा गया है कि प्रदेश के करीब 12 प्रसिद्ध शक्ति एवं सिद्धपीठों से पिछले दस वर्षों से सरकार को 3 अरब, 61 करोड़ का राजस्व प्राप्त हुआ है।