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बुरी फंसी सरकार और एमसी, हाईकोर्ट ने मांगा जवाब

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राजधानी शिमला में पानी की समस्या पर हिमाचल हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और नगर निगम प्रशासन से जवाब तलब किया है। आठ जून को अमर उजाला में छपी खबर पर कड़ा संज्ञान लेते हुए हाईकोर्ट ने सरकार और नगर निगम से मई महीने में शहर में की गई पानी की आपूर्ति का पूरा रिकार्ड मांगा है।
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साथ ही शहर के होटलों की वाटर स्टोरेज और खपत का भी विस्तृत ब्योरा मांगा गया है। मामले की आगामी सुनवाई 29 जून को होगी। हाईकोर्ट ने शिमला शहर में साल भर रहने वाले पेयजल संकट के लिए वर्तमान सहित सभी पूर्व सरकारों और नगर निगम को जिम्मेवार माना है। कोर्ट ने नगर निगम को शहर में पानी की नियमित और एक समान आपूर्ति करने के आदेश दिए हैं।

पूछा, क्या है पानी की जांच की प्रक्रिया

हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति त्रिलोक सिंह चौहान ने अमर उजाला की खबर पर स्वत: संज्ञान लेते हुए राज्य सरकार से पूछा है कि पानी की जांच की प्रक्रिया क्या है? जांच कब-कब की जाती है? हाईकोर्ट ने नगर निगम से जनसंख्या के हिसाब से वार्डों में की गई पानी की आपूर्ति का रिकार्ड देने को भी कहा है।

नगर निगम से पूछा गया है कि बिजली नहीं होने की स्थिति में क्या वैकल्पिक व्यवस्था है? पेयजल योजनाओं में कितने जनरेटर लगाए गए हैं? नगर निगम से ये भी पूछा है कि शहर और आसपास के क्षेत्रों में प्राकृतिक स्रोतों के जल का कैसे इस्तेमाल किया जा रहा है
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पूछा, भविष्य के लिए क्या है योजना

क्या अवैध तौर पर कुछ लोगों ने इन प्राकृतिक जल स्रोतों पर कब्जा भी किया हुआ है? कोर्ट ने बिजली बोर्ड से भी पेयजल योजनाओं में वैकल्पिक बिजली सप्लाई देने की व्यवस्था पर रिपोर्ट तलब की है। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से शिमला शहर में जलापूर्ति सामान्य बनाए रखने के लिए भविष्य में क्या योजनाएं बनाई है? इसका रिकार्ड भी तलब किया है।

एक हफ्ते में दूर करनी होगी लीकेज- कोर्ट ने नगर निगम को एक हफ्ते के भीतर पानी की पाइपों की लीकेज को दूर करने के आदेश दिए हैं। कहा कि अगर नगर निगम के पास स्टाफ की कमी है तो राज्य सरकार अतिरिक्त स्टाफ की व्यवस्था करे।
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