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हिमाचल: हाईकोर्ट ने कहा- रास्ते के विवाद का बहाना नहीं चलेगा, उपभोक्ता को बिजली देना बोर्ड की जिम्मेदारी

Mon, 14 Sep 2026 06:11 PM IST
Ankesh Dogra संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला।

सार

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने बिजली उपभोक्ताओं के पक्ष में फैसला सुनाते हुए कहा कि विद्युत अधिनियम की धारा 43 के तहत आवेदन के एक महीने के भीतर बिजली कनेक्शन देना बोर्ड का अनिवार्य दायित्व है। रास्ते में बाधा आने पर बोर्ड को प्रशासन और पुलिस की मदद लेनी होगी। अदालत ने दया राम और वीना ठाकुर के मामलों में छह सप्ताह के भीतर कार्रवाई के आदेश दिए।
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हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार
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हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने बिजली उपभोक्ताओं के हित में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि बिजली कनेक्शन जारी करना और लाइन बिछाने में आने वाली बाधाओं को दूर करना बिजली वितरण कंपनी यानी बिजली बोर्ड का वैधानिक कर्तव्य है। बोर्ड किसी उपभोक्ता को राइट ऑफ वे यानी रास्ता उपलब्ध न होने का बहाना बनाकर बिजली आपूर्ति से वंचित नहीं कर सकता।

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न्यायाधीश संदीप शर्मा ने कहा कि विद्युत अधिनियम की धारा 43 के तहत आवेदन प्राप्त होने के एक महीने के भीतर बिजली कनेक्शन देना बोर्ड का अनिवार्य दायित्व है। यदि लाइन बिछाने के काम में कोई स्थानीय व्यक्ति या तीसरा पक्ष बाधा डालता है, तो बिजली बोर्ड कानून के तहत जिला प्रशासन और पुलिस की मदद ले सकता है। बोर्ड अपनी कमियों या किसी अन्य व्यक्ति के विरोध का ठीकरा उपभोक्ता पर नहीं फोड़ सकता।

अदालत ने कहा कि विद्युत अधिनियम और वर्क्स ऑफ लाइसेंसी रूल्स, 2006 के तहत लाइन बिछाने में बाधा आने पर लाइसेंसी को जिला मजिस्ट्रेट या पुलिस प्रशासन की सहायता लेकर समस्या का समाधान करना चाहिए। हाईकोर्ट ने यह फैसला दया राम और वीना ठाकुर बनाम हिमाचल प्रदेश स्टेट बिजली बोर्ड से संबंधित दो अलग-अलग याचिकाओं का निपटारा करते हुए सुनाया।
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छह सप्ताह में नई लाइन चालू करने के आदेश
एक मामले में शिमला के गलोट गांव निवासी दया राम के मकान के ऊपर से खतरनाक सिंगल-फेज बिजली लाइन गुजर रही थी। बिजली बोर्ड ने नई वैकल्पिक लाइन तो बिछा दी थी, लेकिन रास्ते के विवाद के चलते उसे चालू नहीं किया गया और पुराने खंभे व तार भी नहीं हटाए गए। कोर्ट ने दया राम की याचिका स्वीकार करते हुए बिजली बोर्ड को छह सप्ताह के भीतर नई लाइन चालू करने तथा याचिकाकर्ता के घर के ऊपर से पुराने खंभे और तार हटाने के आदेश दिए।

वर्ष 2013 से लंबित था थ्री-फेज कनेक्शन
दूसरे मामले में वीना ठाकुर ने वर्ष 2013 में थ्री-फेज बिजली कनेक्शन के लिए आवेदन किया था और निर्धारित फीस भी जमा कर दी थी। इसके बावजूद अन्य भू-मालिकों के विरोध और राइट ऑफ वे उपलब्ध न होने का हवाला देकर बोर्ड ने वर्षों तक कनेक्शन जारी नहीं किया।

हाईकोर्ट ने बोर्ड की लापरवाही पर नाराजगी जताते हुए छह सप्ताह के भीतर वीना ठाकुर के परिसर में थ्री-फेज बिजली कनेक्शन स्थापित करने के आदेश दिए। अदालत ने स्पष्ट किया कि बिजली कनेक्शन देना बोर्ड की जिम्मेदारी है और रास्ते या तीसरे पक्ष के विवाद को उपभोक्ता के अधिकारों में बाधा नहीं बनने दिया जा सकता।
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