हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने बिजली उपभोक्ताओं के हित में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि बिजली कनेक्शन जारी करना और लाइन बिछाने में आने वाली बाधाओं को दूर करना बिजली वितरण कंपनी यानी बिजली बोर्ड का वैधानिक कर्तव्य है। बोर्ड किसी उपभोक्ता को राइट ऑफ वे यानी रास्ता उपलब्ध न होने का बहाना बनाकर बिजली आपूर्ति से वंचित नहीं कर सकता।
न्यायाधीश संदीप शर्मा ने कहा कि विद्युत अधिनियम की धारा 43 के तहत आवेदन प्राप्त होने के एक महीने के भीतर बिजली कनेक्शन देना बोर्ड का अनिवार्य दायित्व है। यदि लाइन बिछाने के काम में कोई स्थानीय व्यक्ति या तीसरा पक्ष बाधा डालता है, तो बिजली बोर्ड कानून के तहत जिला प्रशासन और पुलिस की मदद ले सकता है। बोर्ड अपनी कमियों या किसी अन्य व्यक्ति के विरोध का ठीकरा उपभोक्ता पर नहीं फोड़ सकता।
अदालत ने कहा कि विद्युत अधिनियम और वर्क्स ऑफ लाइसेंसी रूल्स, 2006 के तहत लाइन बिछाने में बाधा आने पर लाइसेंसी को जिला मजिस्ट्रेट या पुलिस प्रशासन की सहायता लेकर समस्या का समाधान करना चाहिए। हाईकोर्ट ने यह फैसला दया राम और वीना ठाकुर बनाम हिमाचल प्रदेश स्टेट बिजली बोर्ड से संबंधित दो अलग-अलग याचिकाओं का निपटारा करते हुए सुनाया।