हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने स्वास्थ्य विभाग में आउटसोर्स आधार पर 1,000 रोगी मित्रों की तैनाती और 290 पदों की भर्ती के लिए जारी मांग पत्र पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने राज्य सरकार की उस नीति पर गंभीर सवाल उठाए हैं, जिसके तहत नियमित भर्ती के बजाय बार-बार आउटसोर्स कर्मचारियों की नियुक्ति की जा रही है।
मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने बाल कृष्ण की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश जारी किया। सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से उप-अधिवक्ता जनरल ने अदालत को बताया कि सरकार रोगी मित्र नीति पर पुनर्विचार कर रही है। सरकार ने यह भी आश्वासन दिया कि एक अन्य समान मामले के लंबित रहने तक इस नीति को लागू नहीं किया जाएगा। सरकार के इस बयान को रिकॉर्ड पर लेते हुए हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि अगले आदेश तक रोगी मित्रों की कोई नई भर्ती या तैनाती नहीं की जाएगी।
याचिका में सरकार की उस योजना को चुनौती दी गई थी, जिसके तहत स्टाफ नर्स के समान शैक्षणिक योग्यता रखने वाले 1,000 लोगों को अस्पतालों में आउटसोर्स आधार पर तैनात किया जाना था। इन कर्मचारियों को 15,000 रुपये प्रतिमाह का निश्चित मानदेय दिए जाने का प्रावधान था। इसके अलावा विभिन्न चिकित्सा संस्थानों में 290 पदों को भरने के लिए 1 अगस्त 2026 को जारी मांग पत्र को भी चुनौती दी गई थी।