हाईकोर्ट ने अवैध भवनों को नियमित करने के लिये बनाये गए संशोधित कानून को चुनौती देने वाले मामले पर फैसला सुरक्षित रख लिया। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजय करोल व न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान की खंडपीठ के समक्ष बुधवार को अभिमन्यु राठौर और अन्य की ओर से दायर याचिकाओं पर अंतिम सुनवाई हुई।
कोर्ट ने नए कानून के तहत भवनों के नियमितीकरण के लिए किए गए आवेदनों पर अंतिम निर्णय लेने पर रोक लगा रखी है। मामले के अनुसार 24 जनवरी, 2017 को सरकार ने एक अधिसूचना जारी कर हिमाचल प्रदेश टाउन एंड कंट्री प्लानिंग (संशोधन) अधिनियम 2016 राजपत्र में प्रकाशित किया।
इस कानून को 15 जून 2016 से लागू माना गया। इस कानून को 24 जनवरी 2018 तक प्रभावी भी बनाया गया। इस अधिसूचना के तहत नियमितीकरण के लिए संबंधित लोगों को 60 दिनों का समय देते हुए आवेदन आमंत्रित किए गए। नियमितीकरण फीस 400 से 1000 रुपए प्रति वर्ग मीटर निर्धारित की गई है।
प्रार्थी अभिमन्यु राठौर की ओर से दायर याचिका में सरकार पर आरोप लगाया गया है कि इस तरह के कानूनों से अवैध निर्माणों को बढ़ावा दिया जाता है जिससे ईमानदार लोग खुद को असहज अनुभव करते हैं।
प्रार्थी ने उक्त कानून के तहत आए नक्शों को नियमित करने के लिए आवेदनों को कोर्ट में मंगवाने की गुहार भी लगाई है। प्रार्थी ने उन कर्मियों के खिलाफ भी कार्रवाई किए जाने की मांग की है जिनके कार्य क्षेत्र में उनकी जानकारी होते हुए अवैध निर्माण किए जा रहे हैं।
रेलवे भूमि से तुरंत हटाए जाएं अवैध कब्जे
प्रदेश उच्च न्यायालय ने शिमला, कांगड़ा, सोलन और ऊना के जिलाधीशों को आदेश दिए हैं कि वह रेलवे भूमि पर किए गए अवैध कब्जों को तुरंत प्रभाव से हटाएं।
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजय करोल और न्यायाधीश अजय मोहन गोयल की खंडपीठ ने तीनों जिलाधीशों को आदेश दिए कि वह न्यायालय के आदेशों की अनुपालना में 2 दिनों के भीतर स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करें।
भारतीय रेलवे की ओर से कोर्ट को यह जानकारी दी गई थी कि पालमपुर स्थित रेलवे के खसरा नंबर 1631, 1632, 1635 पर अवैध रूप से कब्जा कर रखा है। इसके अलावा जतोग स्टेशन और जतोग ट्रैक के नीचे कुछ जगह लोगों ने रेलवे की भूमि पर अतिक्रमण कर रखा है।
शिमला में शिवा कोल कंपनी, कृष्णा कोल कंपनी, ग्रेफाइट कोल कंपनी, पंजाब कोल कंपनी और कश्मीर कोल कंपनी ने भी अतिक्रमण कर रखा है।
ऊना में भी मंदिर, गौशाला, स्कूल और निजी इमारत के लिए रेलवे भूमि पर अतिक्रमण किया है। इन जिलों के पुलिस अधीक्षकों को आदेश दिए हैं कि वह अतिक्रमण हटाते समय जिला प्रशासन को पर्याप्त पुलिस सहायता मुहैया करवाएं।