उनकी शादी हिमाचल के ऊना निवासी से हुई, जो स्वयं इसी जाति से हैं। हिमाचल प्रदेश में भी बाती जाति को ओबीसी का दर्जा प्राप्त है और उनके पास सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी प्रमाणपत्र भी है। रिटर्निंग ऑफिसर ने उनका नामांकन यह कहकर रद्द कर दिया कि आरक्षण के लाभ राज्य-केंद्रित होते हैं। अधिकारी के अनुसार, एक प्रवासी व्यक्ति को उस राज्य के मूल निवासियों के लिए आरक्षित सीट पर चुनाव लड़ने की अनुमति देना संरचनात्मक भेदभाव के उद्देश्य को विफल कर देगा। आरक्षण का उद्देश्य उस विशिष्ट भूगोल के पिछड़े वर्गों को लाभ पहुंचाना है, जिन्होंने वहां ऐतिहासिक रूप से नुकसान झेला है। सरकार ने तर्क दिया कि याचिकाकर्ता के पास हिमाचल प्रदेश पंचायती राज चुनाव नियम, 1994 की धारा 175(1)(सी) के तहत चुनाव याचिका दायर करने का वैकल्पिक उपाय मौजूद है।
प्रदेश हाईकोर्ट ने हमीरपुर जिले के चमनेड़ वार्ड नंबर 7 से जिला परिषद सदस्य पद के प्रत्याशी रोहित शर्मा के नामांकन को रद्द करने के फैसले को खारिज कर दिया है। न्यायाधीश ज्योत्सना रिवाल दुआ की एकल पीठ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए यह आदेश पारित किया। रोहित शर्मा ने 11 मई 2026 को नामांकन पत्र दाखिल किया था। हालांकि, 12 मई को एक अन्य पक्ष ने इस आधार पर आपत्ति दर्ज कराई कि याचिकाकर्ता के दादा ने सरकारी भूमि पर अतिक्रमण किया था और 2002 में इसके नियमितीकरण के लिए आवेदन किया था। इस शिकायत के आधार पर रिटर्निंग ऑफिसर ने हिमाचल प्रदेश पंचायती राज अधिनियम की धारा 122 के तहत याचिकाकर्ता का नामांकन रद्द कर दिया था। वरिष्ठ अधिवक्ता ने दलील दी कि याचिकाकर्ता के दादा का निधन 2017 में ही हो चुका है और पिछले 9 वर्षों से परिवार का कोई भी सदस्य उस भूमि पर काबिज नहीं है। अदालत ने राजस्व दस्तावेजों और तथ्यों का अवलोकन करने के बाद रिटर्निंग ऑफिसर के पुराने आदेश को रद्द कर दिया। कोर्ट ने निर्देश दिए हैं कि रिटर्निंग ऑफिसर रोहित शर्मा के नामांकन पर नए सिरे से विचार करें। चुनाव आयोग ने आश्वासन दिया कि दस्तावेज मिलने के एक घंटे के भीतर नामांकन पर अंतिम निर्णय ले लिया जाएगा।